व्यक्तित्व

क्या आक्रमक छवि के साथ उभर रहे हैं राहुल

क्या आक्रमक छवि के साथ उभर रहे हैं राहुल

देश में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की लोकप्रियता पीएम मोदी जी से कम नहीं है। हर भारतीय के लिए राहुल गांधी पर बात करना और उन पर हंसना, उन्हें बहुत आसान लगता है। जिसे सत्ता रूढ़ पार्टी ने देश के लोगों के सामने पप्पू बना दिया, वास्तव में वो बहुत ही गंभीर और समझदार नेता हैं। ये मुमकिन है कि राहुल गांधी में भाषण देने की कला प्रधानमंत्री से जरा कम हों। कई बार उनके भाषणों में कही बात को एडिट करके ऐसे पेश किया गया, जैसे मानों राहुल कोई बिना सर पैर की बात कर रहे हों।

राहुल गांधी कोई आम नेता नहीं हैं। उनके नाम के साथ गांधी-नेहरू परिवार की विरासत जुड़ी हुई है। 19 जून 1970 को नई दिल्ली में जन्मे राहुल गांधी आज देश की राजनीति में एक ऐसा चेहरा हैं जिनका नाम लिए बिना सत्तारूढ़ पार्टी का भी काम नहीं चलता। आज राहुल गांधी के जन्मदिन पर, कांग्रेस के कार्यकर्ताओं सेवा दिवस मना रहे हैं। कोरोना काल में कांग्रेस के कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व के जन्मदिन पर जरूरमंद लोगों को मास्क और खाना बांटेंगे। राहुल गांधी को भले ही सरकार ने राजनीति का एक नादान बच्चा समझा हो, लेकिन राहुल गांधी ने कई मौकों पर खुद को एक संजीदा नेता साबित किया है। राहुल ने सत्ता पर हमला करते हुए कई बार ये बात कही है कि वह समानता, अहिंसा और न्याय के सिद्धांतो पर आधारित राजनीति करते हैं।

सुरक्षा कारणों से कई वर्षों का करनी पड़ी घर में पढ़ाई

राहुल गांधी की दादी और पिता ने प्रधानमंत्री पद की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। जब राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी पर उनके अंगरक्षकों ने गोली चलाई, तो उस समय राहुल गांधी काफी छोटे थे। और राहुल को सुरक्षा कारणों से अपनी स्कूली पढ़ाई घर से ही करनी पड़ी। हालांकि, स्कूल की बाकी पढ़ाई उन्होंने दिल्ली के मॉर्डन स्कूल और देहरादून के दून स्कूल से की।
इतना ही नहीं सुरक्षा के चलते उन्हें दो बार अपना कॉलेज बीच में छोड़ना पड़ा। अपनी स्कूली पढ़ाई खत्म करने के बाद राहुल ने उच्च शिक्षा की शुरुआत सेंट स्टीफन कॉलेज से की थी। लेकिन, सुरक्षा के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने अमरीका जाकर हावर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, राजीव गांधी (Rajiv Ghandhi) की हत्या के बाद राहुल में यहां से भी अपनी पढ़ाई छोड़ दी।। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल राजनीति में उतरेंगे या अपने परिवार को संभालेंगे। लेकिन, प्रियंका गांधी ने सभी को यह बताया कि राहुल गांधी फिलहाल अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और परिवार को वो संभालेंगी। तब राहुल गांधी ने 1994 में फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज ऑफ आर्ट्स से अपना स्नातक (ग्रेजुएशन) किया और फिर ट्रिनिटी कॉलेज कैंब्रिज से एम.फिल की डिग्री प्राप्त की।

सुरक्षा के चलते बदलना पड़ा नाम

राहुल गांधी का जीवन कहने को तो शानो शौकत से भरा हुआ था। लेकिन उनके लिए मुसीबतें भी कम नहीं थीं। गांधी परिवार में तीन सदस्यों की आकस्मिक मौत हो चुकी थी। जिनमें उनके पिता और दादी की निर्मम हत्या की गई थी। जिसके चलते सुरक्षा कारणों से न सिर्फ उन्हें कॉलेज और स्कूल बदलने पड़े, बल्कि उन्हें अपना नाम बदलने के लिए भी मजबूर होना पड़ा। राहुल गांधी को उच्च शिक्षा के दौरान उनके सहपाठी राउल विंसी के नाम से जानते थे। हालाकि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वो जल्द ही भारत लौट आए।

पहले चुनाव में भरी मतों के अंतर से हासिल की जीत

कहा जाता है राहुल गांधी कभी राजनीति में आना नही चाहते थे। राहुल को क्रिकेट खेलना, घूमना और अपनी फिटनेस का ख्याल रखना अच्छा लगता था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरेंगे। अपनी सास और पति की मौत के बाद सोनिया गांधी ने भी कुछ समय तक राजनीति से दूरी बना ली थी। इस दौरान राहुल गांधी ने पढ़ाई पूरी करने के बाद लंदन की एक मॉनिटर मैनेजमेंट कंसलटेंसी फर्म ग्रुप के साथ काम किया, फिर मुंबई में वापस आकर उन्होंने बेकअप्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना की और यहां डाइरेक्टर के रूप में कार्य किया।
लेकिन जल्द ही ये सब पीछे छोड़ कर राहुल ने इंदिरा, राजीव और अपने परदादा नेहरू की तरह राजनीति में अपना पहला कदम रखा। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। पहले ही चुनाव में जनता ने उन पर भरोसा जताया और 2,85,853 मतों के भारी अंतर से राहुल ने जीत दर्ज की। समय के साथ पार्टी ने उनका कद और ओहदा दोनो बढ़ने लगा। 2013 में उन्हें कांग्रेस का उपाध्यक्ष चुना गया। इसके बाद 2017 में राहुल कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए। इसके अलावा 2019 के आम लोकसभा चुनावों में राहुल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी रहे। लेकिन हार गए।

2019 में हार गए अमेठी

राहुल जिस समय प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे, उसी चुनाव में उनके हाथ से अमेठी की सीट निकल गई और अमेठी से स्मृति ईरानी की जीत हुई। हालांकि ने 2019 राहुल ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से पर्चा भरा था। जिसमें से राहुल वायनाड की सीट से जीत कर संसद पहुंचे। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के हवाले से अमेठी के लोगों का कहना था कि राहुल गांधी ने अमेठी के लिए काफी कुछ किया, पर वो लोगों तक कभी नहीं पहुंचा। उनके कार्यकर्ता ही आपस में सारा मुनाफा बांट लेते थे। इसके अलावा राहुल जब भी यहां आते थे, तो सिर्फ कुछ खास या यूं कहें कि उनके चमचों से ही मिलते थे। जबकि बीजेपी के नेता हर आम और खास व्यक्ति से मिलते हैं। साथ ही बीजेपी कार्यकर्ताओं से गरीबों की योजना का पैसा गरीबों तक पहुंच जाता है। उनके कार्यकर्ता घोटाला नहीं करते।

पार्टी में होती रही है बगावत

राहुल कांग्रेस पार्टी के युवा नेता माने जाते हैं और कई पुराने और अनुभवी नेताओं का कहना है कि राहुल पुराने नेताओं को दरकिनार कर युवा नेताओं को ज्यादा तरजीह देते हैं। कई वरिष्ठ नेता खुल कर राहुल के नेतृत्व पर सवाल सवाल उठा चुके हैं। जिनमें से कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि इन नेताओं ने कई बार ये भी कहा कि कांग्रेस ही उनकी पहचान है। कोई उन्हें कांग्रेसी होने या न होने का सर्टिफिकेट नहीं दे सकता।

यही नहीं, कांग्रेस में कुछ ऐसे नेता भी रहें, जो राहुल गांधी के काफी नजदीकी माने जाते थे। लेकिन न सिर्फ उन्होंने बगावत की, बल्कि समय के साथ कांग्रेस का दमन ही भी छोड़ दिया। ऐसे नेताओं में सिंधिया और जितिन प्रसाद का नाम प्रमुख तौर पर लिया जाता है।

ज्योतिरादित्या सिंधिया ( jyotiraditya scindia) राहुल गांधी के साथ पढ़े और दोनों ने अपना राजनीतिक जीवन की शुरआत भी लगभग एक साथ ही की। सिंधिया राहुल के काफी करीबी माने जाते थे। लेकिन जब सिंधिया अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ कर सत्तारूढ़ पार्टी में जाकर शामिल हो गए, तो इससे कांग्रेस और राहुल को काफी बड़ा झटका लगा। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद एमपी की सरकार गिर गई और कमलनाथ को अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह यूपी में बड़ा चेहरा कहे जाने वाले जितिन प्रसाद (Jitin prasad) भी उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए।

जब अपने ही कार्यकर्ता ने कह दिया था पप्पू

एक बार राहुल गांधी को उन्हीं के कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर पप्पू कह कर संबोधित कर दिया था। इसके बाद विनय प्रधान नाम के इस कार्यकर्ता को जिलाध्यक्ष के पद से हटा दिया गयाI इस संबंध में विनय प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी सच में पप्पू हैं और हम पप्पू मुक्त भारत अभियान की शुरुआत करेंगे। एक अखबार के मुताबिक विनय प्रधान कहते हैं कि “राहुल गांधी चापलूसों से घिरे हैं। मैंने जो मैसेज किया था वह राहुल गांधी की तारीफ में था, लेकिन उन्हें उसका भी मतलब समझ में नहीं आया।”

कई महत्वपूर्ण मौकों पर विदेश चले जाते हैं राहुल

ऐसा कई बार हुआ है कि भारत में किसी महत्वपूर्ण घटना, आयोजन और हालतों के दौरान राहुल गांधी देश में नहीं होते। अकसर कई अहम मौकों पर राहुल विदेश दौरे पर निकल जाते हैं। इसकी वजह से कांग्रेस के बहुत से नेता और कार्यकर्ता खुद भी चिंता भी व्यक्त कर चुके हैं।

समय के साथ बदल रहे हैं राहुल गांधी

कहते हैं कोई भगवान के घर से कुछ नहीं सीखता। उसी तरह राहुल भी एक समय पर राजनीति में नए थे। उनकी दिलचस्पी भी राजनीति में नहीं थी। इसलिए कई बार उनसे कुछ ऐसी गलतियां हुई, जो नहीं होने चाहिए थीं। जिस समय केंद्र सरकार में यूपीए हुआ करती थी। उस समय राहुल ने यूपी विधानसभा के दौरान सपा का मेनिफेस्टो बता कर एक खाली पर्चा फाड़ दिया था। जिसके बाद उन्हें हर तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

आज राहुल को देश की राजनीति में एक दशक से भी ज्यादा का समय हो चुका है। राहुल अब एक अनुभवी नेता हैं। उनका अनुभव और देश के मुद्दों के प्रति गंभीरता साफ तौर पर देखी जा सकती है। हाल ही में हाथरस के निर्मम बलात्कार को लेकर राहुल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे, लेकिन योगी सरकार ने सुरक्षा बल का प्रयोग कर प्रियंका और राहुल गांधी को हाथरस से पहले ही रोक दिया। इस दौरान राहुल को सुरक्षा बलों ने धकेल कर जमीन पर गिर दिया। तब लोगों ने राहुल गांधी की जमीनी राजनीति की जमकर तारीफ की थी।

राहुल ने सरकार के द्वारा अचानक लिए गए फैसलों के परिणाम से भी प्रधानमंत्री को कई बार आगाह किया। बीते साल लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के बंद होने से देश की जीडीपी सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी। जिसका अनुमान राहुल पहले से लगा चुके थे और उन्होंने सरकार से अपील की थी कि वह प्रत्यक्ष रूप से गरीबों के हाथ में पैसे दें। जिससे उनकी क्रय शक्ति मजबूत हो और मार्केट दोबारा अपनी स्तिथि में वापस आ सके। लेकिन सरकार ने बड़े-बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ किए। सिर्फ कुछ ही लोगों को आर्थिक रियायतों का फायदा मिला पाया।

आक्रामक नेता के तौर पर उभर रहे हैं

राहुल न सिर्फ गंभीर नेता के तौर कर लोगों के सामने आ रहे हैं बल्कि एक आक्रमक नेता के रूप में भी उभर रहे हैं। राहुल गांधी अब सीधे और साफ शब्दों में बीजेपी की विचारधारा व नीतियों की आलोचना करते नजर आते हैं। एक मंच से भाषण देते हुए उन्होंने कहा था “मेरा नाम राहुल गांधी है। राहुल सावरकर नहीं। मैं माफी नहीं मांगूंगा।” दरअसल, उस समय राहुल गांधी ने एक बयान दिया था। राहुल ने बयान में कहा था कि नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया की बात करते थे। लेकिन आज हमें अखबारों में सिर्फ रेप इन इंडिया दिखाई देता है। इस बयान के बाद सियासी गलियों में हंगामा मच गया और बीजेपी राहुल से माफी मांगने की बात पर अड़ गई। पर राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि वो किसी कीमत कर माफी नहीं मांगेंगे।

एक दफा और स्मृति ईरानी ने मंच राहुल गांधी के लिए युवराज शब्द का इस्तेमाल किया था। जिस पर राहुल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि “युवराज कहे जाना मुझे अपमान जनक लगता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। और आज की तारीख में इस शब्द का कोई मतलब नहीं है।”।

इस समय देश के सबसे फिट नेताओं में से एक हैं राहुल

राहुल गांधी हाल ही में केरल के दौरे पर गए थे। जहां उन्होंने मछुआरों के साथ समुंद्र में स्विमिंग भी की थी। जब वो पानी से बाहर निकले तो उनके ऐब्स दिखने लगे। जिस पर कई कांग्रेसी नेताओं ने राहुल की फिटनेस की ट्वीट के जरिए तारीफ भी की थी। कांग्रेसी नेता और बॉक्सर विजेंद्र सिंह ने लिखा-“ये तो किसी बॉक्सर के ऐब्स हैं। सबसे बहादुर, युवा और फिट। अभी आपको आगे जाना है राहुल जी”।

भले ही राहुल प्रधानमंत्री मोदी की तरह योग या कसरत की वीडियो सोशल मीडिया पर न डाली हो पर राहुल वाकई में काफी फिट हैं। एक बार किसी छात्र के कहने पर राहुल ने एक सांस में 14 पुशअप और कुछ वन हैंड पुशअप लगा लिए थे। अब देखना ये है यह है कि आने वाले चुनावों में राहुल प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक मजबूत विकल्प के तौर पर खुद को लोगों के सामने पेश कर पाते हैं? और क्या कांग्रेस को एक बार फिर देश की सत्ता की मंजिल तक पहुंचा पाते हैं या नहीं?

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Heena Sen