उत्तरप्रदेश

BSP के झांसी सम्मेलन में नहीं आये ब्राह्मण

BSP के झांसी सम्मेलन में नहीं आये ब्राह्मण

यूपी में अगले साल चुनाव हैं।ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने न केवल अपनी कमान संभाली है, वहीं सभी ने अपने राजनैतिक समीकरण साधना भी शुरू कर दिया है।

बीएसपी (बहुजन समाज पार्टी) इस बार यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक संभालने की कोशिश करेगी।जिसके लिए पार्टी की तरफ से “ब्राह्मण सम्मेलन” का आयोजन करने की योजना बनाई गई।योजना के बाद ब्राह्मण सम्मेलन का नाम बदल कर “प्रबुद्ध सम्मेलन” कर दिया गया।वहीं इन सम्मेलनों की शुरुआत राम नगरी अयोध्या से की गई।

पार्टी की तरफ से इन सम्मेलनों की कमान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा (satish chandra mishra) संभाल रहे हैं।यहाँ गोर करने वाली बात ये है कि हाल ही जो सम्मेलन झांसी में हुआ वो बीएसपी के लिए फ्लॉप साबित होता दिख रहा है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जिस वर्ग के लिए ये सम्मेलन किया गया उसकी ही संख्या यहाँ न के बराबर थी। वहीं मौजूद लोगों को भी उंगलियों पर गिना जा सकता था।

बीएसपी के सम्मेलन में खाली थे पंडाल

झांसी में हुए बीएसपी के “प्रबुद्ध सम्मेलन” में पंडाल खाली दिखे।सम्मेलन झांसी के बस स्टॉप के पास एक विवाह घर मे किया गया।मंच और पंडाल दोनों ही बेहतरीन सजे थे, लेकिन यहाँ सभा के रूप में चंद लोग ही मौजूद थे।

उस पर भी सम्मेलन शुरू होते ही वो चंद लोग भी वहाँ से चले गए।ये सम्मेलन बीएसपी ने ब्राह्मण समाज के लिए आयोजित किया था, मगर ब्राह्मण समाज ने इस सम्मेलन को भाव नहीं दिया। पंडाल में जो ब्राह्मण समाज से जुड़े लोग आख़िर तक रहे वो भी किसी कोने में रूठे से दिखाई दिए। एक बात और है कि ये बीएसपी के नेता ही थे।

सतीश चंद्र की समधन भी नहीं पहुंची सम्मेलन में

बीएसपी के इस प्रबुद्ध सम्मेलन में राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र की समधन अनुराधा शर्मा भी नहीं पहुंची। मीडिया ने जब इससे जुड़ा सवाल पूछा तो महासचिव सतीश तिलमिला उठे और दूसरे सवाल पूछने को कहा। मीडिया के दुबारा यही सवाल पूछने पर नेताजी गुस्से में कुर्सी से उठ गए।

बता दें कि सतीश चंद्र मिश्रा बीएसपी के नेता हैं और ब्राह्मण समाज से आते हैं,वहीं उनकी समधन अनुराधा शर्मा बीएसपी से लोकसभा केंडिडेट रह चुकी हैं।

अयोध्या से की थी सम्मेलन की शुरुआत

बीएसपी ने इस सम्मेलन की शुरूआत जुलाई महीने में की थी।वहीं इसकी शुरूआत राम नगरी अयोध्या से की गई।इसके बाद दूसरा मथुरा , तीसरा वाराणसी और चौथा चित्रकूट में होने की घोषणा की थी।

ब्राह्मण समाज के वोटों को अपने पाले में लाने के लिए बीएसपी की ओर से महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा और पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे को इस सम्मेलन का मुख्य चेहरा बनाया है।अपनी पार्टी के इन प्रबुद्धजनों के बलबूते ही बीएसपी इस बार दाव खेल रही है।हालांकि झांसी में उसका ये दावा फीका दिख रहा है।

14 साल बाद फिर खेला है दांव।

आज तक के मुताबिक बीएसपी ने 2007 में भी ऐसा ही दांव खेला था।उस समय बीएसपी से 41 ब्राह्मण विधायक जीत कर आए थे।हालांकि,ये सभी एक एक कर पार्टी छोड़ कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो गए।

वहीं वर्तमान में बसपा के पास ब्राह्मण चेहरे के तौर पर सतीष चंद्र मिश्रा, नकुल दूबे, विनय तिवारी, रत्नेश पांडेय और हाल ही में पार्टी में वापसी करने वाले पवन पांडेय ही मौजूद हैं।

झांसी के खाली पंडालों के बाद बीएसपी का ये दावा कितना कारगर होता है ये देखना दिलचस्प होगा।

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Sushma Tomar