जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते ?

जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते ?

लोक नायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज (8 अक्टूबर) को पुण्यतिथि है और तीन दिन बाद ग्यारह अक्टूबर को उनकी जयंती । सोचा जा सकता है कि वे आज अगर हमारे बीच होते तो क्या कर रहे होते ! 1974 के ‘बिहार आंदोलन’ में जो अपेक्षाकृत छोटे-छोटे नेता थे, आज वे ही बिहार और केंद्र […]

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 खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

हम डर रहे हैं यह स्वीकार करने से कि हमें गांधी की अब ज़रूरत नहीं बची है।ऐसा इसलिए नहीं कि गांधी अब प्रासंगिक नहीं रहे हैं, वे अप्रासंगिक कभी होंगे भी नहीं। हम गांधी की ज़रूरत को आज के संदर्भों में अपने साहस के साथ जोड़ नहीं पा रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितियों के साथ समझौते […]

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 लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

लता जी पर मैंने कोई बीस-इक्कीस वर्ष पहले एक आलेख लिखा था । अवसर था इंदौर में ‘माई मंगेशकर सभागृह ‘के निर्माण का । उसमें मैंने लता जी के साथ उसके भी सोलह वर्ष पूर्व(1983) इंदौर की एक होटल में तब उनके साथ हुई भेंटवार्ता का ज़िक्र किया था । उस आलेख का शीर्षक दिया […]

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 हरिवंश कथा – पत्रकारिता और सत्ता का घालमेल से लेकर राज्यसभा तक

हरिवंश कथा – पत्रकारिता और सत्ता का घालमेल से लेकर राज्यसभा तक

वे तमाम लोग जो नीतिपरक (एथिकल ) पत्रकारिता की मौत और चैनलों द्वारा परोसी जा रही नशीली खबरों को लेकर अपने छाती-माथे कूट रहे हैं, उन्हें हाल में दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए खाँटी सम्पादक-पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) को लेकर मीडिया में चल रही चर्चाओं पर नज़र डालने के बाद […]

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