नागरिकों को ही ‘विपक्ष’ का विपक्षी बनाया जा रहा है !

नागरिकों को ही ‘विपक्ष’ का विपक्षी बनाया जा रहा है !

सरकार ने अब अपने ही नागरिक भी चुनना प्रारम्भ कर दिया है। सत्ताएँ जब अपने में से ही कुछ लोगों को पसंद नहीं करतीं और मजबूरीवश उन्हें देश की भौगोलिक सीमाओं से बाहर भी नहीं धकेल पातीं तो उन्हें अपने से भावनात्मक रूप से अलग करते हुए अपने ही नागरिकों का चुनाव करने लगती है। […]

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 ओबामा की किताब से भी मुद्दा आख़िर तलाश ही लिया गया !

ओबामा की किताब से भी मुद्दा आख़िर तलाश ही लिया गया !

राहुल गांधी के आलोचक ऐसा कोई मौक़ा नहीं छोड़ते कि कैसे कांग्रेस के इस आक्रामक नेता को विवादों के घेरे में लाया जा सके ! कुछेक बार तो राहुल स्वयं ही आगे होकर अवसर उपलब्ध करा देते हैं (जैसे अपनी ही सरकार के फ़ैसलों से सम्बंधित काग़ज़ों को सार्वजनिक रूप से फाड़ना ) पर अधिकांशतः […]

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 आमजन की अवमानना के ख़िलाफ़ सुनवाई देश की किस अदालत में होगी 

आमजन की अवमानना के ख़िलाफ़ सुनवाई देश की किस अदालत में होगी 

बहुत सारे लोगों ने तब राय ज़ाहिर की थी कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के ‘अपराध’ में वकील प्रशांत भूषण को बजाय एक रुपया जुर्माना भरने के तीन महीने का कारावास स्वीकार करना चाहिए था। भूषण शायद कारावास मंज़ूर कर भी लेते, पर तब उन्हें तीन साल के लिए वकालत करने पर भी प्रतिबंध भुगतना […]

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 नतीजे लिखेंगे सिंधिया की भाजपा में भावी भूमिका की पटकथा ?

नतीजे लिखेंगे सिंधिया की भाजपा में भावी भूमिका की पटकथा ?

बिहार के साथ-साथ लोग अब यह भी जानना चाहते हैं कि मध्य प्रदेश की अट्ठाईस सीटों के लिए तीन नवम्बर को पड़े मतों के नतीजे क्या निकलने वाले हैं ? बिहार से भिन्न, मध्य प्रदेश के चुनावों की विशेषता यह रही है कि भाजपा के पास तो जनता को रिझाने के लिए कोई नारा था […]

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 अर्नब की लड़ाई मीडिया की आज़ादी की लड़ाई नहीं है

अर्नब की लड़ाई मीडिया की आज़ादी की लड़ाई नहीं है

कोई मीडिया प्रतिष्ठान चीन के साथ सीमा पर वर्तमान में चल रहे तनावपूर्ण सम्बन्धों के दौरान अगर ऐसी खबर चला दे कि सैनिकों के बीच सेनाध्यक्ष के निर्णयों के प्रति (कथित तौर पर) ‘विद्रोह’ पनप रहा है तो रक्षा मंत्रालय और सरकार को क्या करना चाहिए? भारतीय सेना के मनोबल को कमज़ोर करने वाली इस […]

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 जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते ?

जेपी आज होते तो कितने लोग उनका साथ देते ?

लोक नायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज (8 अक्टूबर) को पुण्यतिथि है और तीन दिन बाद ग्यारह अक्टूबर को उनकी जयंती । सोचा जा सकता है कि वे आज अगर हमारे बीच होते तो क्या कर रहे होते ! 1974 के ‘बिहार आंदोलन’ में जो अपेक्षाकृत छोटे-छोटे नेता थे, आज वे ही बिहार और केंद्र […]

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 खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

हम डर रहे हैं यह स्वीकार करने से कि हमें गांधी की अब ज़रूरत नहीं बची है।ऐसा इसलिए नहीं कि गांधी अब प्रासंगिक नहीं रहे हैं, वे अप्रासंगिक कभी होंगे भी नहीं। हम गांधी की ज़रूरत को आज के संदर्भों में अपने साहस के साथ जोड़ नहीं पा रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितियों के साथ समझौते […]

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 लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

लता मंगेशकर यानी ख़ुशबू के शिलालेख पर लिखी प्रकृति की कविता

लता जी पर मैंने कोई बीस-इक्कीस वर्ष पहले एक आलेख लिखा था । अवसर था इंदौर में ‘माई मंगेशकर सभागृह ‘के निर्माण का । उसमें मैंने लता जी के साथ उसके भी सोलह वर्ष पूर्व(1983) इंदौर की एक होटल में तब उनके साथ हुई भेंटवार्ता का ज़िक्र किया था । उस आलेख का शीर्षक दिया […]

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 हरिवंश कथा – पत्रकारिता और सत्ता का घालमेल से लेकर राज्यसभा तक

हरिवंश कथा – पत्रकारिता और सत्ता का घालमेल से लेकर राज्यसभा तक

वे तमाम लोग जो नीतिपरक (एथिकल ) पत्रकारिता की मौत और चैनलों द्वारा परोसी जा रही नशीली खबरों को लेकर अपने छाती-माथे कूट रहे हैं, उन्हें हाल में दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए खाँटी सम्पादक-पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) को लेकर मीडिया में चल रही चर्चाओं पर नज़र डालने के बाद […]

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