नज़रिया –  क्या अरविंद केजरीवाल ड्रामेबाज़ हैं ?

नज़रिया – क्या अरविंद केजरीवाल ड्रामेबाज़ हैं ?

यह लेख हमें आम आदमी पार्टी के शाहनवाज़ सिद्दीक़ी ने भेजा है, इस लेख को हम उनके नाम से ही प्रकाशित कर रहे हैं. पूरे भारत में 29 राज्य हैं, हर जगह सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खस्ता है, जबकि दिल्ली में सरकारी स्कूलों का कायाकल्प हो गया है, स्कूल विश्वस्तरीय हो गए हैं, सरकारी […]

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 ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िए – अदम गोंडवी

ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िए – अदम गोंडवी

आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहब की कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे तालिबे शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छ: चमचे रहें माइक रहे […]

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 हिंदी से ये हिकारत क्यों?

हिंदी से ये हिकारत क्यों?

हमारी महान मातृभाषा हिंदी हमारे अपने ही देश हिंदुस्तान में रोजगार के अवसरों में बाधक है। हमारे देश की सरकार का यह रुख अभी कुछ अरसा पहले ही सामने आया था। बोलने वालों की संख्या के हिसाब से दुनिया की दूसरे नंबर की भाषा हिंदी अगर अपने ही देश में रोजगार के अवसरों में बाधक […]

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 व्यक्तित्व – जब शहीद अब्दुल हमीद की बहादुरी के आगे ध्वस्त हुये पाक सेना के टैंक

व्यक्तित्व – जब शहीद अब्दुल हमीद की बहादुरी के आगे ध्वस्त हुये पाक सेना के टैंक

आज 4th बटालियन, ग्रेनेडियर में तैनात हवालदार अब्दुल हमीद की शहादत दिन है। 1965 युद्ध में पाकिस्तानी सेना का सीना चीर कर उस समय के अपराजेय माने जाने वाले उसके “पैटन टैंकों” को तबाह कर देने वाले 32 वर्षीय वीर अब्दुल हमीद आज ही के दिन खेमकरण सेक्टर, तरन तारण में शहीद हुए थे. उन्हें […]

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 सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

सिस्टम बदलने के लिये लगातार मेहनत की ज़रूरत है

“लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है” इत्यादि-इत्यादि…. यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें बनी हुई हैं। जब लोग लोकतंत्र के […]

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 सज़ा का मक़सद केवल दोषी को सुधारना नही होता

सज़ा का मक़सद केवल दोषी को सुधारना नही होता

यह एक गलत तर्क है कि सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना होता है, सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना नहीं बल्कि अन्य लोगो को गलत कार्य और उसके परिणाम के प्रति चेताना भी होता है। मतलब बुरे काम का बुरा नतीजा आना आवश्यक है। अगर बुरे काम के भी अच्छे नतीजे आने […]

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