पुलवामा हमला – सवाल ये होना चाहिये कि सुरक्षा में चूक कहाँ हुई?

पुलवामा हमला – सवाल ये होना चाहिये कि सुरक्षा में चूक कहाँ हुई?

एक तरफ जहाँ पूरे देश में पुलवामा में शहीद हुये जवानों की शोक की लहर उमड़ पड़ी है, हर किसी के आँख में आँसू है। तो दूसरी तरफ चंद ज़ाहिल लोग इसमें साम्प्रदायिकता का एंगल निकाल कर समाज को तोड़ने का खेल शुरू कर दिए हैं। टीवी स्टूडीयो में बैठा हुआ एंकर एक तरफ़ से […]

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 नज़रिया – भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है

नज़रिया – भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25,26,27,28 प्रत्येक नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और ये मौलिक अधिकारों की सूची में दर्ज है जिसका हर हाल में पालन होना चाहिए। इस अधिकार का मूल उद्देश्य भारत में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को बनाए रखना है। संविधान के तीसरे भाग में सम्मिलित ये सब मौलिक अधिकार, नागरिकों […]

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 वो शख्स जिसने दिया था इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा

वो शख्स जिसने दिया था इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा

एक ऐसा शख़्स जिसने फ़क़ीरी और दरवेशी में अपनी ज़िंदगी गुज़ार दी, जिसका टूटा फूटा मकान था जिसमें टाट का पर्दा लगा रहता था। जिसके पास एक मैला-कुचैला थैला रहा करता था। उस थैले में फटे पुराने कपड़े, एक लोटा और चंद कागज़ात रहा करते थे। जो शख़्स जब संविधान सभा की बैठक में आता […]

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 ये यूपी है जनाब…. धर्मनिरपेक्षता यहाँ अंतिम साँसे गिन रही है

ये यूपी है जनाब…. धर्मनिरपेक्षता यहाँ अंतिम साँसे गिन रही है

इस देश में हर दिन सार्वजनिक स्थलों पर संघ की शाखा लगती है जो शुद्धरूप से राजनीतिक रहती है, क्या इसकी अनुमति कभी ली जाती है? हर महीने बहुसंख्यक समाज का कोई न कोई त्यौहार आता है जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर खूब कार्यक्रम होते हैं पर आजतक किसी ने उसपर आपत्ति नहीं उठाई बल्कि लोग […]

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 संघ के मंच पर कभी नहीं गए अंबेडकर

संघ के मंच पर कभी नहीं गए अंबेडकर

अम्बेडकर के समय में देश में कांग्रेस थी, वामपंथ था, संघ भी था। अम्बेडकर की इन तीनों से मतभेद थे। लेकिन अम्बेडकर अपनी असहमति के साथ कांग्रेस के मंच पर जाया करते थे, कम्युनिस्टों के प्रोग्राम में भी जाकर अपनी बात रखते थे। लेकिन इसका कहीं भी प्रमाण नहीं मिलेगा कि बाबा साहेब आरएसएस के […]

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 कुछ यूं बढ़ी हत्यारों की हिम्मत

कुछ यूं बढ़ी हत्यारों की हिम्मत

अगर अख़लाक़ के हत्यारों को सरेआम बीच चौराहे पे लटकाकर फाँसी दे दी गई होती तो फिर किसी में दोबारा हिम्मत नहीं होती इस तरह का आतंक फैलाने की। लेकिन उलटा उन हत्यारों को सम्मानित किया गया, हत्यारों के पक्ष में लोग बयान देने लगे। हत्या के आरोपी की मृत्यु पर उसके शव को तिरंगे […]

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 क्या सॉफ्ट हिंदुत्व के चक्कर में मौलाना आज़ाद को भूल गए "राहुल गांधी" ?

क्या सॉफ्ट हिंदुत्व के चक्कर में मौलाना आज़ाद को भूल गए "राहुल गांधी" ?

मौलाना आज़ाद की जयंती पर मात्र तीन लोगों द्वारा सेंट्रल हाल में पहुँच कर उन्हें श्रद्धांजलि देना और मोदी सरकार के बड़े चेहरे एवं पूरी कांग्रेस की लीडरशिप का ग़ायब रहना वाक़ई शर्मनाक है। अफ़सोस तो ये है कि राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस पार्टी तक ने ट्वीट करके बधाई तक नही दी। ग़ुलाम नबी आज़ाद […]

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 कलाम साहब इस देश के अनमोल नगीने एवं भारतीय मुस्लिम समाज का गौरव हैं

कलाम साहब इस देश के अनमोल नगीने एवं भारतीय मुस्लिम समाज का गौरव हैं

डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम साहब निजी जीवन में धार्मिक व्यक्ति थे। इनकी किताबें पढ़ने से पता चलता है कि इनका धर्म के प्रति विश्वास कितना गहरा था। इस्लामी परम्परा का ये बख़ूबी पालन करते थे। अपनी किताब ‘इग्नाइटेड माइंड’ में इन्होंने क़ुरान से लेकर पैग़म्बर मोहम्मद साहब का ज़िक्र भी बख़ूबी किया। कई […]

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 नज़रिया – मुस्लिमों के मसलों पर राईट टू फ्रीडम ऑफ़ रिलीजन कहाँ चला जाता है?

नज़रिया – मुस्लिमों के मसलों पर राईट टू फ्रीडम ऑफ़ रिलीजन कहाँ चला जाता है?

देश की राजधानी से सटे गुड़गाँव में एक मस्जिद को सीज़ कर दिया गया, अल्पसंख्यक समुदाय के लोग वहाँ दो दिन से बाहर बैठे हैं पर राजधानी में कहीं कोई हलचल नहीं? आख़िर क्यों? क्या इक्कीसवीं सदी के इस चमकते भारत में बहुसंख्यक गुंडागर्दी एवं आतंक के सहारे देश की व्यवस्था चलेगी? कानून एवं संविधान […]

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 नज़रिया – हज़रतगंज चौराहा, मुग़लसराय, औरंगजेब रोड का नाम ही क्यों बदला गया?

नज़रिया – हज़रतगंज चौराहा, मुग़लसराय, औरंगजेब रोड का नाम ही क्यों बदला गया?

एक दिन सियासत तुम्हारा नाम निसार से बदलकर नरेश कर देगी और तुम बस लोकतंत्र को बचाते रहना। नाम बदलना कोई छोटी बात नहीं है। ये तुम्हारी विरासत, तुम्हारे आब-ओ-अजदाद की कुर्बानियां, तुम्हारी तारीख़ के साथ सबसे बड़ा हमला है। यक़ीन न हो तो जाके यूरोप में उन शहरों को देख लो कि जहाँ तुम्हारे […]

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