धारा 144 का इस्तेमाल विचारों की वैध अभिव्यक्ति को रोकने के टूल के रूप में नहीं किया जा सकता

धारा 144 का इस्तेमाल विचारों की वैध अभिव्यक्ति को रोकने के टूल के रूप में नहीं किया जा सकता

भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था का वर्तमान स्वरूप, ब्रिटिश राज ने 1858 में जब 1857 के विप्लव के बाद सीधे अपने आधीन कर लिया था तब बनाया। दंड प्रक्रिया संहिता, सीआरपीसी भी उसी समय संहिताबद्ध हुई। चूंकि भारत एक औपनिवेशिक दासता में था और 1857 का विप्लव हो चुका था, और अंग्रेज इस बात से सदैव […]

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