नज़रिया – जनता को बेवकूफ़ बनाती हैं राजनीतिक पार्टियां

नज़रिया – जनता को बेवकूफ़ बनाती हैं राजनीतिक पार्टियां

हमारे संविधान में दिए गए प्रावधानों के अनुसार, हमें पांच साल बाद चुनाव कराने होते हैं। 1952 से इस रिहर्सल का बार-बार दोहराया गया है। राजनीतिक लोग आपस में सहयोगी व एक ही सोच के हैं। उन्होंने राजनीति जिसको कभी समाज सेवा का रूप माना जाता था, को अपना व्यवसाय, पार्टी व टीम बना एक […]

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