6 फरवरी को लोकसभा में भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तानी कहने  के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए. हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कठोर सजा के साथ तीन साल की सजा की मांग की थी. इस मांग पर भाजपा के सांसद विनय कटियार को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने कह दिया कि मुसलमानों की भारत में आवश्यकता नहीं है.  विनय कटियार ने कहा कि मुसलमानों को इस देश में रहना ही नहीं चाहिए.

भाजपा  नेता विनय कटियार ने बुधवार को AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी  के बयान पर कहा कि मुस्लिमों ने धर्म के नाम पर देश को तोड़ा है, इसलिए उन्हें यहां से चले जाना चाहिए.


कटियार ने कहा, “सरकार को एक ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे वंदे मातरम्, तिरंगे की बेइज्जती करने वालों और पाकिस्तानी झंडे लहराने वालों को सजा दी जा सके

देश के बंटवारे की वजह ही मुसलमान थे और जनसंख्या के आधार पर उनका बंटवारा कर दिया गया तो फिर उन्हें इस देश में रहने की आवश्यकता क्या है.
उन्होंने कहा कि उनकी मांग के अनुरूप उन्हें एक अलग भू-भाग दे दिया गया है वो वहां जाकर रहें. उनके लिए दो-दो देश हैं बांग्लादेश और पाकिस्तान वो जाएं और वहां जाकर रहें उनका यहां क्या काम है.

कटियार और ओवैसी की जुबानी जंग में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी कूद पड़े. उन्होंने कहा, ”अगर मुसलमान देश के नागरिक हैं तो उन्हें ये स्वीकार करना चाहिए कि उनके पूर्वज हिंदू थे। उनके DNA के मुताबिक ये सच है.”


कटियार के बयान के बाद इस पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि, भाजपा का  कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है और चिराग बुझने से पहले फड़फड़ाता है। हम क्या कह सकते हैं, अब वे बूढ़े हो गए हैं.”

क्या है पूरा मामला?

भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तानी कहे जाने के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में भारतीय मुसलमानों के हक में एक विशेष प्रकार के कानून की मांग की है.
ओवैसी ने मंगलवार को लोकसभा में मुस्लिमों से हो रहे बुरे बर्ताब का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी उन्हें और देश के तमाम मुसलमानों को पाकिस्तानी कहकर पुकारा जाता है.
केंद्र सरकार को इसे रोकने के लिए कानून बनाना चाहिए. इसे गैर-जमानती अपराध के दायरे में लाते हुए कम से कम 3 साल की सजा का प्रावधान करना चाहिए.

एआईएमआईएम सांसद ने सदन को यह भी बताया कि विभाजन के वक्त भारत में रहने वाले मुसलमानों ने मोहम्मद अली जिन्नाह की टू-नेशन थ्योरी को नकार दिया था.

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