देशभर में राज्य सरकारे इस समय मूर्तियों के लिए 4 बड़े प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च कर रही है. इन चारो प्रोजेक्ट की लागत जोड़े तो करीब 6939 करोड़ रूपये अनुमानित है. केवल मुर्तिया बनाने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उतरप्रदेश की सरकारे यह राशी खर्च कर रही है. मध्यप्रदेश की सरकार आदि शंकराचार्य की 108 फिट ऊँची मूर्ति बनवा रही है. इसकी लागत तय नही हुई है, मगर एक अनुमान के मुताबित इस पर लगभग 200 करोड़ रूपये खर्च हो सकते है. इसके लिए सरकार एकात्मक यात्रा निकल रही है.
इन चारो मूर्तियों के अलावा देश में निजी संस्थान और मंदिर ट्रस्ट भी भव्य मुर्तिया स्थापित में लगे है. तेलंगाना में संत रामानुजाचार्य की 216 फिट ऊँची परतिमा बनाई जा रही है. इसका निर्माण मंदिर ट्रस्ट करवा रहा है. यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बैठी हुई परतिमा होगी. इसके अलावा राजस्थान में एक निजी समूह नाथद्वारा में शिवाजी परतिमा बनवा रहा है. इसकी ऊंचाई 351 फिट है. इस तरह कुल 6 बड़ी मूर्तियों पर काम चल रहा है. जबकि इन्ही राज्यों में कई जरूरी काम पैसो की कमी से रुके पड़े है.
ये राज्य वित्तीय संकट से भी जूझ रहे है. जैसे मध्यप्रदेश की बात करे तो किसी भी बड़े राज्य के लिए 200 करोड़ की राशी मायने नही रखती, लेकिन वर्तमान में मध्यप्रदेश की वित्तीय स्तिथि ठीक नही है. राज्य सरकार ने सड़क निर्माण का पैसा जुटाने के लिए पेंट्रोल डीजल पर 50 पैसे सेस लगा दिया. इसी तरह ऐन वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले प्रोपर्टी की रजिस्ट्री शुल्क भी 10 फीसदी तक बढ़ा दिया है. जीएसटी लगी होने के बाद राजस्व में कमी और चुनाव वर्ष में लोकलुभावन योजनाओं के लागु किये जाने के दबाव के चलते प्रदेश सरकार ने 5 करोड़ रूपये के अधिक के भुगतानों पर पहले ही रोक लगा दी है. जिसका असर निर्माण कार्यो पर दिखने लगा है. न ही सडको का काम नियत गति से चल रहा है और न ही नये स्कूलों के अथवा नये अस्पतालों का निर्माण या रेनोवेसन हो पा रहा है.
 
गुजरात- मूर्ति के लिए 2989 करोड़ रूपये की मांग 17,620 करोड़ रूपये का लोन
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यहां बन रही है – गुजरात में बन रही स्टेच्यु ऑफ़ यूनिटी में 2989 करोड़ रूपये लग रहे है. इसका 70 प्रतिशत कार्य पुरा हो गया है . लौह पुरुष सरदार पटेल की 182 मीटर इस प्रतिमा पर अब तक 1100 करोड़ रूपये खर्च हो चुके है. जुलाई 2018 तक इसके तयार हो जाने का अनुमान है.
जबकि सौराष्ट्र में पानी पहुचाने के लिए चाहिए 4600 करोड़ रुपये
इसी गुजरात सरकार ने विविध विकाश योजनाओ के लिए इंटरनेशनल एजेंसियों के पास से 17,620 करोड़ रूपये के सॉफ्ट लोन के लिए केंद्र सरकार को पर्स्ताव भेजा है. सौराष्ट्र अंचल में नर्मदा का पानी पहचानी की महत्वकांक्षी सौनी योजना के लिए 4600 करोड़ रूपये चाहिए. दूसरी और वर्ल्ड बैंक एवं जापानी जाईका जैसी एंजेंसियो की की फंडिंग से मेट्रो रेल सहित कई प्रोजेक्ट चल रहे है. पैसो की कमी से प्रोजेक्ट रुके नही है.
महाराष्ट्र – 3600 करोड़ का स्मारक लेकिन कई जरूरी योजनाये अटकी

 
यहां बन रही है –मुंबई के गिरगाव चौपाटी के पास अरब सागर में महाराष्ट्र सरकार शिवाजी स्मारक बना रही है. 210 मीटर ऊँचे इस स्टेच्यु पर करीब 3600 करोड़ रूपये कर्च किये जायेंगे. अब तक 15 करोड़ 86 लाख रूपये कर्च हो चुके है. शिव स्मारक के लिए राज्य सरकार अपने बजट में हर साल आवंटन दे रही है.
जबकि 200 करोड़ की खेती योजना भी शुरू नही हो सकी
सरकार ने राज्य में गट खेती योजना शुरू करने की घोषणा की थी. 200 करोड़ रूपये चाहिए थे लेकिन अभी तक यह योजना शुरू नही हो पाई है. सरकार ने बजट में कोल्ड वैन योजना और 349 चलते फिरते पशु वेधकीये चिकित्सालय शुरू करने की बात कही कही थी लेकिन यह भी शुरू नही हो पाया है. सरकार के मत्स्य वयवसाय विभाग ने दो साल पहले “चलते फिरते मछली बिक्री केंद्र” शुरू करने की योजना घोषित की थी. यह योजना बजट के आभाव में शुरू नही हो पाई है.
 
उत्तरप्रदेश- पिजिआई को बहेतर ईलाज के लिए चाहिए 473 करोड़
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यहां बन रही है – उत्तरप्रदेश की सरकार की और से प्रमुख धार्मिक नगर अयोध्या में भगवान राम की 108 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव है. फ़िलहाल प्रतिमा स्थापना क लिए कोई फल नही की गयी है. बजट प्रावधान या लागत का आंकलन नही किया गया है. प्रतिमा पर 150 से 200 करोड़ रूपये कर्च होगा. लोगों से भी चंदा लिया जायेगा.
जबकि इमरजेंसी वार्ड ही नही बन पा रहा है
लखनऊ के पिजिआइ में 250 बेड का इमरजेंसी वार्ड लीवर व किडनी ट्रांसप्लांट सेण्टर का निर्माण शुरू नही हो सका है. इन पर 473 करोड़ का कर्च होना है. ट्रामा सेण्टर की स्थापना के मामले में भी फंड की कमी आड़े आ रही है. जिससे लाखो लोगों को लम्बे समये तक मदद मिल सकती है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन विधि विज्ञान प्रयोगशाला कन्नौज का भवन फंड न मिलने से पिछले करीब 8 महीने से रुका हुआ है. यह ऐसी दर्जनों योजनाये और है.
दो और मुर्तिया यह भी बन रही है:
तेलंगाना– हैदराबाद से 40 किमी दूर शमशाबाद में संत रामानुजाचार्य की 216 फिट ऊँची प्रतिमा बनाई जा रही है. पूरा प्रोजेक्ट 1000 करोड़ रूपये का है.
जबकि हैदराबाद के पुराने शहर के विकास के लिए तत्कालीन सीएम डॉक्टर वायस राज्सेखर रेड्डी ने 2 हजार करोड़ रूपये के बजट की घोषणा की थी, लेकिन यह अब तक क्रियान्वित नही हो पाई है. वही हैदराबाद में 72 किमी लम्बा दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो प्रोजेक्ट तंगी के चलते अधुरा पड़ा है.
राजस्थान-राजस्थान के नाथद्वारा में 351 फिट की शिव प्रतिमा बन रही है इसका निर्माण एक निजी समूह कर रहा है. करीब 600  मजदूर और 100 मूर्ति बनाने में जूटे है.
जबकि दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कोरिडोर व मेट्रो फेज-2 का काम पैसो की कमी चलते आगे नही बढ़ पाया है. डीएमआईसी प्रोजेक्ट 6 वर्षो से फाइलो से भर नही निकल सका है. पैसो का जुगाड़ नही होने के चलते अब सरकार ने प्रोजेक्ट साइज़ घटा दिया है.
(सोर्स- दैनिक भास्कर)

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सुभाष बगड़िया

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