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मध्यप्रदेश- खरगोन में इकट्ठा हुये दलित आदिवासी और किसान, कहा – NPR , NRC और CAA नामंजूर

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28 जनवरी 2020: भोपाल/खरगोन आज खरगोन जिले में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एन.पी.आर), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एन.आर.सी.) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) के खिलाफ दलित, आदिवासी, तथा अन्य नागरिक समूहों द्वारा ‘संविधान बचाओ जन आन्दोलन’ के नाम से एकजुट हो कर, मध्य प्रदेश सरकार से प्रदेश सरकार से प्रदेश में एन.पी.आर नहीं लागू करने के सम्बन्ध में विधान सभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग भी उठाई।
नितिन वर्गिस बताते हैं कि एन.पी.आर. तथा एन.आर.सी से गरीब एवं आम नागरिकों को प्रताड़ित किया जाएगा, तथा धर्म आधारित भेदभाव करने वाला सी.ए.ए. संविधान विरोधी है। इसलिए ये तीनों किसी एक समाज का मुद्दा नहीं है, बल्कि हर नागरिक का है। एन.पी.आर, एन.आर.सी तथा सी.ए.ए को एक ही कड़ी का हिस्सा बताते हुए इनको हर नागरिक के संवैधानिक और लोकतान्त्रिक अधिकारों पर एक बड़ा खतरा बताया गया।
दूर-दराज़ ग्रामों से आए आदिवासी महिला-पुरुष सहित लगभग 30000 से ज्यादा लोगो ने महा जनसभा में भाग लिया । बलाई समाज के अध्यक्ष राजू गांगले, एड. एस.के.गांगले, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के विक्रम अच्छालिया, क्षेत्र के अम्बेडकरवादी कार्यकर्त्ता एम.डी चौबे, आदिवासी एकता परिषद् के सुभाष पटेल, जागृत आदिवासी दलित संगठन के सकाराम पटेल, लया बाई, और नासरी बाई जैसे अलग अलग संगठनों के जन प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित किया।

भीम आर्मी के राज्य स्तरीय कार्यकर्ता, सुनील अस्ते ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि -“हम पूरे मध्य प्रदेश में सभी जगह अपने भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े है। हम इस एन.आर.सी और सी.ए.ए का बहिष्कार करते है और हम इनसे अपनी आखिरी साँस तक लड़ेंगे।” इस दौरान सभा में भीम आर्मी के प्रदेश कार्यकारिणी के दत्तू मेढे, सत्येंद्र सेंगर, तथा सुनील चैहान भी मौजूद थे।
आदिवासी महिलाओं में से जागृत आदिवासी दलित संगठन की ज्ञानी बाई का सरकार को कहती हैं कि शर्म आनी चाहिए सरकार को। हर हर मोदी घर घर मोदी मांग कर वोट मांगा, अब उन्हीं लोगों से सबूत मांगते है?! वोट लेकर अब कंपनियों को बड़ा कर रही हैं ये सरकार, और अब हम सब को धर्म और जाति के नाम पर नाम बांट रहे है – इंसानियत से बड़ा और कुछ नहीं, हमे नहीं चाहिए यह कानून!
श्री योगेन्द्र यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “प्रधान मंत्री सिर्फ सिर पर टोपी और हिजाब ही दिखता है, काश एक और कपड़ा देख लेते, पर उन्हें एक और अनूठा कपड़ा लहराते हुए नहीं दिखता, तिरंगे का कपड़ा नहीं दिखता।कोई भी और प्रधान मंत्री हर गली, हर गांव, हर मोहल्ले में तिरंगा लहराते हुए संविधान की प्रस्तावना पाढ़ा जाता देख उसकी छाती गर्व से फूल जाती। पर आज वह हाथ में तिरंगा लिए संविधान के साथ सड़कों पर उतरे लोगों के कपड़ों पर टिप्पणी कर रहे हैं।”
पूर्व आई.ए.एस अधिकारी रह चुके हर्ष मंदर ने अपने आसाम के नज़रबंदी केन्द्रों (डीटेंशन सेंटर) के अपने अध्ययनों के अनुभव को बाटां और कहा कि एन.आर.सी की प्रक्रिया में केवल एक समाज के लोग नहीं निकाले गए, जिसमें 14 लाख हिन्दू एवं आदिवासी थे, सिर्फ इसी कारण की वह अपने काग़ज़ से अपनी भारतीयता साबित नहीं कर पाए। आज खरगोन में हमने साबित कर दिया किया कि हम आज भी गांधी के संतान है, गोडसे के नहीं और हम इसी तरह संविधान के बचाव में डटे रहेंगे।
जागृत आदिवासी दलित संगठन कि कार्यकर्ता, माधुरी बहन का कहना था कि- “एन.पी.आर. एन.आर.सी. आम नागरिकों को प्रताड़ित करने की एक योजना है। क्या हमने इसीलिए सरकार को चुना था कि वह हमे नोटबंदी में कतारों में खड़ा करे? क्या अब हम कौमवाद और जातिवाद के दीमक से ग्रस्त सरकारी तंत्र के हाथों नागरिकता का प्रमाण सौंप देंगे? हम मध्य प्रदेश सरकार से पूछते है कि वह एन.पी.आर और एन.आर.सी के खिलाफ विधान सभा में प्रस्ताव पारित करेंगे कि नहीं? जब तक एन.पी.आर और एन.आर.सी पर रोक नहीं लगता, हम केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से लड़ेंगे, और यह अभियान जारी रहेगा।”
धरने में विरोध कर रहे आदिवासी किसान-मजदूरों ने केंद्र सरकार के द्वारा खेती, रोजगार तथा पलायन के मौजूदा संकट को नज़रंदाज़ कर एन.पी.आर. और एन.आर.सी. के जरिए आम जनता के नागरिकता पर ही सवाल खड़ा करने के इस मुहिम को बेतुका तथा जन विरोधी कहा। सरकारी कागज़ बनाने में दफ्तरों और कमीशन कि ताक में बैठे दलालों से पहले से परेशान आम जनता कि नागरिकता ही किसी भ्रष्ट बाबू के मन-मर्ज़ी पर टिके, यह हमें मंज़ूर नहीं, हम काग़ज नहीं दिखाएंगे!”
विरोध में अये लोगों का कहना हैं कि केंद्र सरकार द्वारा धर्म के आधार पर भेदभाव कर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) के ज़रिए नफ़रत और साम्प्रदायिकता कि राजनीति करने के इस गैर संविधानिक प्रयास को खारिज करना ज़रूरी है | संविधान के आजादी, बराबरी तथा भाईचारे के मौलिक सिद्धांतों के ऊपर सी.ए.ए. के हमले का पूरजोर विरोध करने के लिए सभी संविधान तथा देश प्रेमी नागरिक खड़े है | अगर संविधान पर इस हमले का विरोध नहीं किया जाएगा तो आगे चल हमारे सभी लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे | इस विरोध प्रदर्शन को एन.पी.आर, एन.आर.सी. तथा सी.ए.ए. के खिलाफ संविधानिक मूल्यों को बचाने के लिए एक लम्बे आन्दोलन कि शुरुआत बताई | संवैधानिक मूल्यों को बचाने का प्रण लेते हुए उपस्थित सभी आन्दोलनकारियों के सामने संविधान की प्रस्तावना को दस साल कि हफ्सा ने पढ़ा, जिसको दोहरा कर सभी ने संविधान पर होने वाले हमलों के खिलाफ आवाज उठाने की शपथ ली।