दो से ज़्यादा बच्चे हैं तो यूपी में आपको सरकारी नौकरी नही मिलेगी

Share

पूरी दुनिया संग भारत में जनसंख्या किसी संक्रमण की तरह तेजी से फैली है। पिछले 2 दशक में पॉपुलेशन ग्रोथ रेट सबसे अधिक रही है। भारत की जनसंख्या जो साल 2000 में 105.66 करोड़ थी वह आज 2021 में 135 करोड़ हो गई है। पहले जहां स्कूलों में पढ़ाया जाता था कि चीन की जनसंख्या सबसे ज्यादा थी वहीं आज चीन और भारत लगभग एक हो गए है।

11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। भारत में कई बड़े लोग और राजनेताओं ने इस उपलक्ष पर अपने विचार समाज के साथ सांझा किए। मगर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक कदम आगे बढ़कर काम किया है। उन्होंने रविवार को नई जनसंख्या नीति अपने प्रदेश के लिए जारी की है। इस नई जनसंख्या नीति से संबंधित और भी सुझाव प्रदेश के लोगों से 18 जुलाई तक सांझा करने को कहा गया है।

क्या है इस नीति में खास?

योगी सरकार द्वारा प्रस्तावित इस नई जनसंख्या नीति में मुख्य केंद्र बिंदु “बच्चे दो ही अच्छे” वाले सिद्धांत पर रखा गया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नई जनसंख्या नीति के फॉर्मेट में 2 बच्चों वाले नियम का पालन करने वाले लोगों को कई फायदे सरकार की तरफ से देने की बात कही गई है। अगर कोई सरकारी कर्मचारी नियम का पालन करता है तो उसके सेवाकाल के दौरान दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट दी जाएगी। नए मां बाप बने लोगों को पूरे पेमेंट के साथ 12 महीने की छुट्टी दी जाएगी।

अगर कोई दो से ज्यादा बच्चों के लिए जाता है तो उन्हें बहुत सारी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। जैसे, उस व्यक्ति के परिवार को सिर्फ 4 लोगों का ही राशन दिया जाएगा, सरकार चाहे तो उन्हें मिलने वाली सरकारी योजनाओं को भी उनसे छीन सकती है, उस दंपति को किसी भी तरह के लोकल, निकाय और पंचायत चुनाव में खड़ा होने का मौका नहीं दिया जाएगा, उन्हें सरकारी नौकरियों के लिए भी योग्य नहीं माना जाएगा और कोई सरकारी सब्सिडी भी उन्हें नहीं मिल पाएगी।

इस नीति में यह भी कहा गया है कि सभी सरकारी स्कूलों में जनसंख्या नियंत्रण की जागरूकता बच्चों में हाई स्कूल लेवल से ही अनिवार्य कर दी जाए।

एक बच्चे के बाद नसबंदी करा लेने पर सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता

पूरे नीति में सरकार ने लोगों को आर्थिक मदद सिर्फ एक बिंदु पर देने की बात की है। प्रस्ताव के अनुसार अगर विवाहित दंपति एक बच्चे के बाद नसबंदी का विकल्प चुन ले तो उसको बेटा होने पर 80,000 रुपए और बेटी होने पर 1,00,000 रुपए दिए जाएंगे।

यह राशि बच्चे के भविष्य में पढ़ाई, आदि में सहायता के लिए प्रदान किए जाएंगे।

पॉपुलेशन फंड भी गठित

नई जनसंख्या नीति या अधिनियम का पालन कराने के लिए एक पॉपुलेशन फंड बनाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार द्वारा राशि प्रदान की जाएगी।

इस राशि की मदद से प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसूति केंद्र बनाए जाएंगे, परिवार नियोजन के लिए जागरूकता फैलाई जाएगी, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरे प्रदेश में गर्भधारण, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाए।

क्या योगी कर रहे है मुस्लिम समुदाय पर एक और इनडायरेक्ट वार?

यह सभी जानते हैं कि दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय पर बहु विवाहित होने के लिए कोई रोक टोक नहीं है। एक आदमी दो – तीन लड़कियों से शादी कर सकता है। मगर इस नीति में उन लोगों के लिए खास विस्तृत जानकारी दी गई है।

नीति के अनुसार, किसी मुस्लिम व्यक्ति के पुरे परिवार (जितनी शादी उसने की होगी) से कुल दो बच्चों की ही अनुमति होगी। अगर कोई अपनी पहली पत्नी से दो बच्चे और दूसरी पत्नी से दो बच्चे रखेगा तो उसे सभी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा।

ऐसे में यह साफ साफ लगता है कि इस नीति से योगी इनडायरेक्ट मुस्लिम समुदाय पर ही प्रहार कर रहे है।

विपक्ष के अनुसार “चुनावी स्टंट है योगी की यह नई नीति”

जहां एक तरफ यूपी सरकार के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि,”इस नीति से लोगों का और समाज का ही फायदा है। सीएम योगि का यह एक बेहतरीन कदम है।”

दूसरी तरफ विपक्ष की समाजवादी पार्टी के अनुराग भदौरिया और कांग्रेस पार्टी के नेता पीएल पुनिया ने कहा कि,”2022 के चुनावों के लिए यह योगि सरकार का एक पब्लिसिटी स्टंट है। यूपी के मुख्य समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाकर दूसरी तरह गुमराह किया जा रहा है।”