यूपी चूनाव वैसे तो फरवरी या मार्च के आस पास होना है लेकिन उसकी तैयारियां अभी से शुरू कर ली गयी हैं। क्या भाजपा और क्या सपा और बसपा सभी दलों ने अपनी कमर कसते हुए मज़बूती से चुनाव लड़ने की तैयारियों को बूथ स्तर से करना शुरू कर दिया है। बसपा “प्रबुद्ध” सम्मेलन कर रही है। समाजवादी पार्टी छोटे दलों से तालमेल बना रही है।

इसके अलावा देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने भी यूपी चुनाव बहुत मज़बूती के साथ लड़ने का मन बना लिया है। कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी लगातार यूपी के दौरे पर हैं और वो संग़ठन से लेकर प्रत्याशी चयन करने तक मे खूब मेहनत कर रही हैं। लेकिन कांग्रेस ने टिकट देने के लिए एक अजीब सी शर्त रख दी है।

जिसके बाद कुछ लोग इसे सीरियस ले रहे हैं और कुछ इसका मज़ाक भी बना रहे हैं। क्या है ये शर्त आइये जान लेते हैं।

11 हज़ार रुपये हर उम्मीदवार को देने होंगे।

अजय कुमार लल्लू जो उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हैं उन्होनें एक पत्र जारी करते हुए कहा है कि टिकट की मांग करने वाले उम्मीदवार को आवेदन पत्र के साथ 11 हज़ार रुपये की सहयोग राशि भी पार्टी कार्यालय में जमा करनी होगी।

आखिर मे 2 नाम जाएंगे आलाकमान के पास।

जितने भी आवेदन पार्टी कार्यालय में उम्मीदवार ले कर आयेंगें उनमें से सिर्फ 10 नामों को हर एक सीट पर चुना जाएगा। जिसमें से 2 नामों को ही इलेक्शन कमिटी चुनेगी और 8 नामों को रिजेक्ट कर दिया जाएगा। ये दो नाम ही आलाकमान को भेजे जायेंगें इन दो में से एक नाम को उम्मीदवार बनाया जाएगा।

2017 में क्या रही है कांग्रेस की स्थिति?

पिछला विधानसभा का चुनाव कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिल कर लड़ा था। जिसमें गठबंधन के तौर पर उसे 100 सीटें मिली थी। लेकिन जब परिणाम आएं तो कांग्रेस सिर्फ 7 सीटें ही जीत पाई थी उसका परफॉर्मेंस निराशाजनक रहा था।

इस स्थिति में भी कांग्रेस दोबारा से खुद को रिवाइवल करने की कोशिश कर रही है। लेकिन ज़मीनी सच यही है कि कांग्रेस को बहुत ज़्यादा पसन्द किया नहीं जा रहा है। मुख्य विपक्षी दल के तौर पर सबसे ज़्यादा समाजवादी पार्टी ही को पसन्द किया जा रहा है।

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Asad Shaikh