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कोरोना की तीसरी लहर आने के पहले सरकार ऑक्सीजन, बेड और दवाईयों इंतेज़ाम करे – राहुल गांधी

कोरोना की तीसरी लहर आने के पहले सरकार ऑक्सीजन, बेड और दवाईयों इंतेज़ाम करे – राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के मौजूदा हालतों को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। साथ ही इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कोविड-19 के समय मोदी सरकार की गलतियों और नाकामियों को लेकर तीखा हमला किया है। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना वायरस महामारी को लेकर कांग्रेस की ओर से एक श्वेत पत्र जारी किया है। और सरकार से यह अपील की है कि वह कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए अभी से पूरी तैयारी करें। इस दौरान राहुल ने सरकार पर कई सवाल भी खड़े किए।

कोरोना पर नहीं बंगाल पर था फोकस

महामारी की दूसरी लेकर की अव्यवस्थाओं को लेकर राहुल ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में प्रधानमंत्री का फोकस महामारी में ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की जगह बंगाल के चुनाव पर था। लोगों की जान प्रधानमंत्री के आंसुओं से नहीं बल्कि ऑक्सीजन से बचाई जा सकती थी। कांग्रेस नेता ने कोविड के कुप्रबंधन को लेकर एक रिपोर्ट भी जारी की है।

राहुल ने आगे कहा कि इस ‘श्वेतपत्र’ का मकसद कोरोना की तीसरी लहर से देश को बचाने में मदद करना है। दूसरी लहर का खतरनाक स्वरूप सरकार की लापरवाही का ही नतीजा था। तीसरी लहर के लिए हमें पहले से ही तैयारी करनी होगी। अब वो गलतियां नहीं होनी चाहिए, जो हो चुकी हैं। आगे राहुल बताया कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार वैक्सीनेशन है। सरकार को तेजी से वैक्सीनेशन ड्राइव को बढ़ाना होगा।

एक्सटर्स की चेतावनी के बाद भी नहीं उठाए गए कदम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने आगे कहा की वायरस लगातार म्यूटेड हो रहा है। इसके बावजूद सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए। इसलिए हमने इस श्वेतपत्र में विस्तार उन गलतियों के बारे में बताया है। साथ ही तीसरी लहर का सामना करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। पुरानी गलतियों से सीख कर ही थर्ड वेव के खिलाफ लड़ाई जीती जा सकती है।

श्वेतपत्र में चार मुख्य बिंदु दिए हैं:-

• पहला- तीसरी लहर की तैयारी अभी से शुरू की जाए। पहले की गलतियों को फिर से न दोहराया जाए।
• दूसरा- मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए। ऑक्सीजन, बेड, और दवाओं की कमी न हो। थर्ड वेव में हर गांव, हर शहर में ऑक्सीजन जैसी सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए।
• तीसरा- कोरोना बायोलॉजिकल नहीं, इकोनॉमिकल-सोशल बीमारी है। इसलिए सबसे गरीब व छोटे उद्योग-धंधा करने वाले लोगों को आर्थिक सहायता देने की जरूरत है। हमने न्याय योजना की सलाह दी है। अगर प्रधानमंत्री को नाम नहीं पसंद, तो वे योजना का नाम बदल सकते हैं। इससे गरीबों तक सीधे आर्थिक मदद पहुंचाई जा सकेगी।
• चौथा- कोविड कंपंसेशन फंड बनाया जाए। जिन परिवारों में कोविड के कारण किसी की भी मौत हुई है, उन्हें इस फंड से सहायता राशि दी जाए।

90 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता था

राहुल आगे ने अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि दूसरी लहर में जो मौतें हुए हैं, उनमें दो तरीके की मौत हुई हैं। एक जिन्हें किया गंभीर बीमारियां थी। दूसरी जिनकी मौत हुई उन्हें बचाया जा सकता था। भारत की सेकंड वेव में 90 प्रतिशत मौतों का कारण ऑक्सीजन की कमी थी। राहुल ने आगे बताया-मैंने कई डॉक्टर्स से बात की, उनका कहना था कि अगर समय से ऑक्सीजन मिल जाती, तो इन मौतों का टाला जा सकता था। हमारे देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
आपको बता दें कि कोरोना काल में राहुल की नेशनल मीडिया पर यह पांचवीं प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। इससे पहले भी वे सरकार और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते रहे हैं।

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Heena Sen