बाबाओं के भक्त दिखाते हैं, भारत का अविकसित चेहरा

बाबाओं के भक्त दिखाते हैं, भारत का अविकसित चेहरा

अगर कोई हमसे पूछे कि हमने आज़ादी के बाद 70 सालो में क्या किया है तो हम कहेंगे ‘विकास’। क्यूंकि हमने बड़े बड़े माकन बना लिए, सड़के बनाई ,विदेशी निवेश होने लगा, कारखाने खुल गए ,अस्पताल खुल गए ,महिलाओ को स्वतंत्रता मिल गई,बच्चो को आधुनिक खेल खिलोने मिल गए। कुछ इसी प्रकार हमने विकास का […]

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 गोरखपुर प्रकरण : लापरवाही और सरकारी लीपापोती का ज्वलन्त उदाहरण

गोरखपुर प्रकरण : लापरवाही और सरकारी लीपापोती का ज्वलन्त उदाहरण

इस धरती पर अगर सबसे कीमती चीज़ कोई है तो वो है जीवन जिसकी हिफाज़त हम सभी करते है जीवन का अधिकार सभी अधिकारों में प्रथम स्थान रखता हैऔर इस अधिकार की रक्षा करने का ज़िम्मा हम अपनी सरकार को देते है। क्या हो अगर हमारी चुनी हुई सरकार ही इस अधिकार की धज्जियां उड़ाए […]

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 समाज के घिनौने चहरे को जगज़ाहिर करने के लिये तुम्हें "वीराँगना" बनना होगा

समाज के घिनौने चहरे को जगज़ाहिर करने के लिये तुम्हें "वीराँगना" बनना होगा

पिछले दिनों एक बडे शहर में एक बड़ी घटना हुई घटना बड़ी इसलिए थी क्योंकि इसमें सब कुछ बड़ा बड़ा था। एक बड़ी पार्टी का बड़ा नेता, बडे नेता का बड़ा बिगडेल बेटा,बड़ी सी गाड़ी में,बडे सरकरी अफसर की बड़ी ‘निडर’ बेटी के साथ बड़ी बदतमीज़ी करने लगा। हम विकास बराला और वरालिका की बात […]

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 जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है

जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है

“जलते घरो को देखने वालो पूष का छप्पर आपका है आग़ के पीछे तेज़ हवा है आगे मुकद्दर आपका है” इन पंक्तियों का उपयोग यहाँ कुछ विशेष लोगो के लिए किया जा रहा है वो लोग जो पिछले कुछ घंटो से अपने साहसिक कार्यो से भगवा वाह वाही लूट रहे है भारतीय राजनीति को निचले […]

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 नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है

नीति वो रूपरेखा है जो लक्ष्य को रूप देती है पहचान देती है

नीति शब्द का प्रयोग आप और हम रोज़ाना करते रहते है कभी गंभीर भाव से कभी वैचारिक भाव से कभी प्रश्न भाव से। लेकिन इसकी गहराई में में उतरकर कम ही लोग देखते है। इसका वास्तविक अर्थ, परिभाषा,प्रयोग अलग अलग लोग अलग अलग तरह से करते है जो होना भी चाहिए यह शब्द ही ऐसा […]

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 समकालीन भारतीय राजनीति में गठबंधन का सिर्फ एक नियम होता है, 'सत्ता'

समकालीन भारतीय राजनीति में गठबंधन का सिर्फ एक नियम होता है, 'सत्ता'

भारत में राजनीति जैसा विषय नया नहीं है, ये हर्यक वंश से पहले भी पहचान रखता था और आज भी रखता है। शुद्ध राजनीति का अस्तित्व स्वतंत्रता के पश्च्यात ही देखने को मिलता है और आज़ादी ने भारतीय राजनीति को राजनीतिक संगठनो की सीमाओं में बाँध दिया है,विभिन्न विचारधाराओ ने राजनीति के विभिन्न रूपों को […]

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