विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के बाद ही हर किसी की ज़ुबान पर जिनेवा कन्वेंशन ( geneva convention ) का ज़िक्र है. जब भारतीय पायलट अभिनंदन के लापता होने पर उनके पाकिस्तान में होने की ख़बर आई, तब ही से इस बात का ज़िक्र होने लगा था, कि विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान ज़्यादा दिनों तक बंदी बनाकर नहीं रख सकता, क्योंकि पाकिस्तान भी जिनेवा कन्वेशन का हिस्सा था और उसने जिनेवा संधि पर हस्ताक्षर किये हैं.

जब भारत ने जिनेवा संधि पर हस्ताक्षर किये थे, उस समय पंडित नेहरु देश के प्रधानमंत्री थे

ज्ञात होकी इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में जैसे ही विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई का ऐलान किया था. तब ही से देश में ख़ुशी की लहर दौड़ गई थी. किसी ने इसे इमरान खान का शान्ति का सन्देश बताया तो किसी ने जिनेवा कन्वेंशन की मजबूरी.
पाकिस्तानी संसद में स्पीच के दौरान इमरान खान

क्या है जिनेवा संधि ?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 12 अगस्त 1949 में जिनेवा सम्मलेन में 61 देशों ने भाग लिया. अब तक 194 देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. इसका पहला मसौदा प्रारूप 1864 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में एक सम्मेलन के दौरान विकसित किया गया था. बाद में 1906 में, उन्हें एक नए अनुबंध के साथ बदल दिया गया. 1906 की संधि को भी जिनेवा में भी हस्ताक्षरित किया गया था.

पाकिस्तान ने अभिनंदन का एक वीडियो जारी किया था, जिसमें अभिनंदन चाय पी रहे थे.

  • पहले समझौते के तहत युद्ध के दौरान, चिकित्सा सहायता का कार्य करने वाले और इस उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले भवनों, उपकरणों और वाहनों की सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी.
  • दूसरे समझौते ने पहले समझौते के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया. 1906 की दूसरी संधि एक अंतरराष्ट्रीय संधि थी जिसमें युद्ध के दौरान घायल लोगों की चोटों के साथ-साथ युद्ध की कुछ क्रूर प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था को की गई. इसलिए, 1907 में एक शांति सम्मेलन आयोजित किया गया था. जिसमें सदस्य राज्यों के साथ समझौते पर जिनेवा प्रतिबंध लगाने की जोरदार अपील की गई थी.

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  • 1929 को जिनेवा में ही तीसरा समझौता हुआ, जोकि युद्ध-बंदियों की सुरक्षा पर केंद्रित था. इस समझौते के तहत न केवल लड़ाकू कैदियों से बेहतर व्यवहार करने का सिद्धांत तय किया गया था, बल्कि यह भी तय किया गया था कि युद्ध कैदियों से महत्वपूर्ण और विशेष जानकारी प्राप्त नहीं कर पाएंगे.
  • यह तीसरा समझौता मूल रूप से प्रथम विश्व युद्ध के तल्ख़ अनुभवों के कारण ही हो पाया था. इसके तहत युद्ध बंदियों के साथ-साथ युद्ध से प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा की व्यवस्था भी इस समझौते में की गई थी.·         द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवों के बाद संधि को और संशोधित किया गया. इसी उद्देश्य से शुरुआत में 1946 में चर्चा की गई थी, लेकिन समझौता 1949 में हुए जिनेवा सम्मलेन में हुआ.
जिनेवा संधि पर हस्ताक्षर करते विभिन्न देशों के प्रतिनिधि व प्रमुख ( फोटो क्रेडिट BBC )
  • इस समझौते के तहत, सदस्य देश इस बात के लिए बाध्य होते हैं, कि सैन्य अधिकारी और सैनिकों के साथ बेहतर और सामान व्यवहार किया जायेगा, चाहे वे किसी राष्ट्र या नस्ल के हों, घायल या बीमार हों.
  • इस समझौते के तहत युद्धबंदी सैनिकों और सैन्य अधिकारीयों को जिन इमारतों में रखा जाता है और उन्हें लाने और ले जाने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले वाहनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई थी.
  • यह कार्य अन्तराष्ट्रीय रेड क्रॉस पर आधारित है जोकि विभिन्न जिनेवा सम्मेलनों में पूर्ण किया गया.

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इस संधि का हिस्सा होने के कारण ही भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी युद्ध में बंदी बनाये गए कैदियों का आदान प्रदान होता रहा है. भारतीय वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान द्वारा भारत भेजा जाना भी इसी संधि के तहत हुआ है.