प्रख्यात समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। भारत के समाजवादी आंदोलन के वे एक मज़बूत स्तम्भ थे। 1967 में, महाराष्ट्र के कद्दावर कांग्रेसी नेता एसके पाटिल को बम्बई से हराकर, वे लोकसभा में पहुंचे थे। 1975 में जब आपातकाल की घोषणा हुयी तो वे लंबे समय तक भूमिगत रहे और फिर उनपर सशस्त्र विद्रोह कर सरकार की तख्तापलट का इल्जाम लगा जो बड़ौदा डायनामाइट केस के रूप में चर्चित रहा।
1977 में, आपातकाल हटा दिए जाने के बाद, फर्नांडीस ने अनुपस्थिति में बिहार में मुजफ्फरपुर सीट जीती और उन्हें केंद्रीय उद्योग मंत्री नियुक्त किया गया। केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने निवेश के उल्लंघन के कारण, अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों आईबीएम और कोका-कोला को देश छोड़ने का आदेश दिया।
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1989 से 1990 तक रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कोंकण रेलवे परियोजना को उन्होंने आकार दिया। जनता पार्टी के टूट के बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड जदयू JDU का गठन किया और भाजपा के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार (1998-2004) में रक्षा मंत्री थे। कारगिल युद्ध, पोखरण में परमाणु परीक्षण उनके कार्यकाल में हुये थे । जॉर्ज फर्नांडीस ने 1967 से 2004 तक कुल 9 बार लोकसभा का चुनाव जीत कर संसद में पहुंचे थे।
अल्जाइमर नामक बीमारी से वे लंबे समय से पीड़ित थे। वे मूलतः एक ट्रेड यूनियन नेता थे। कहते हैं उनकी एक आवाज़ पर बम्बई थम जाती थी। 1974 में हुयी जबरदस्त रेलवे हड़ताल उनके ही नेतृत्व में हुयी थी ।