भारत मे उड़ने वाली गाड़ियों का सपना हो सकता है जल्द ही सच हो जाये, सड़को व गलियों में लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए उबर उडने वाली गाड़ियों को भारतीय बाजार में लाने की योजना बना रहा है। यह बात पहली बार भारत आए उबर के सीईओ दारा खुशरोशाही ने भारत को लेकर उबर के फ्यूचर प्लान को बताते हुए साझा की।

ऐसी कैब जो ट्रैफिक के झंझट में फंसे बिना आपको सीधे ऊपर को टेकऑफ कर आपकी मंजिल तक पहुंचाए, उबर अगले पांच साल के अंदर ऐसी ही कैब्स का ट्रायल शुरू करने वाला है जो रोड पर नही बल्कि सीधे हवा में जाएगी। इसकी एडवांस्ड बैटरी पर काम हो रहा है।

रोटर की मदद से हेलीकॉप्टर के मुकाबले यह बहुत कम शोर करेगी। उबर के फ्यूचर प्लान में अपने आप चलने वाली टैक्सियों को शामिल किया गया है, उबर टोयोटा व अन्य से कंपनियों से इस बारे में बातचीत कर रहा है व साथ मिलकर इन टैक्सियों की टेक्नोलॉजी व सॉफ्टवेयर पर काम करेंगे जिसमें की वह खुद चलने वाली टेक्सियों को लाएं।

उबर ने पिछले दिनों कई बाज़ारो से हटते हुए वहां के लोकल प्लेयर्स को अपना कारोबार सौंप दिया ,भारत मे भी ओला से इसे कड़ी टक्कर मिल रही है,साथ ही जापान का सॉफ्टबैंक दोनों कंपनियों में निवेश भी कर रहा है।

ऐसे में भारतीय बाजार पर प्रश्न करने पर दारा ने कहा कि भारत उनके लिए बहुत बड़ा बाजार है और यहां का उनका मॉडल नहीं बदलेगा,सॉफ्टबैंक का दोनों में निवेश है लेकिन उबर की नीति बनाने में और लोगो की राय भी ली जाती है। दारा ने कहा कि वह भारत मे और निवेश करेंगे,दुनिया भर में उबर ट्रिप्स का 10 प्रतिशत भारत से आता है।

उबर को देश के छोटे शहरों तक कब पहुँचाया जाएगा ,इस सवाल पर दारा ने कहा कि वह जल्दबाज़ी करने के बजाय पहले अपना मॉडल और बेहतर बनाना चाहेंगे, तभी ज़्यादा शहरों में जाएंगे।

उबर के एक इंटरनेट कंपनी या ट्रांसपोर्ट कंपनी होने के प्रश्न पर दारा ने उत्तर दिया की हर शहर और हर देश के अपने नियम कायदे है और वह एक ही मॉडल पर चलने के स्थान पर हर जगह बातचीत का रास्ता अपनाएंगे वह उस तरह से कार्य करना पसंद करेंगे जिससे लोकल सरकारी एजेंसियों को अधिक सहूलियत हो। उन्होंने उबर के कर्मचारियों को साथ लेकर कार्य करने का आश्वासन दिया एवं रोजगार मॉडल तय करने व कंपनी में साझेदारी तक कर्मचारियों के साथ मिलकर आगे बढ़ा जाएगा