इन दिनों उन्नाव और कठुवा गैंगरेप के बाद फिर से पोर्न पर बैन की मांग उठने लगी है, ये कोई नयी बात नहीं है, निर्भया कांड के बाद भी पोर्न पर बैन की मान उठी थी और इसी के चलते प्रसिद्ध अधिवक्ता कमलेश वासवानी ने उस समय पोर्न पर बैन के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, 16 दिसंबर 2012 में दामिनी गैंगरेप की घटना ने तो उन्हें झकझोर कर रख दिया था, 43 वर्षीय वसवानी काफी केस स्टडी के बाद इस नतीजे पर पहुंचे थे कि इंटरनेट पर पॉर्नोग्राफी और सेक्स क्राइम में बहुत बड़ा कनेक्शन है. और इसी के चलते अगस्त 2015 में NDA सरकार ने 857 पोर्न साइट्स को बैन कर दिया था.

सरकार के इस क़दम का उस समय सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध भी हुआ था, और इसी के चलते सरकार ने अधिकांश वेब साइट्स से बैन हटा लिया था, मगर फिर भी चाइल्ड पोर्नोग्राफी और ब्ल्यू फिल्म्स जैसी सामग्री वाली 100 से अधिक पोर्न वेब साइट्स पर बैन लगातार अभी तक जारी है.

मोरल पुलिसिंग पर ज़ोर देने वाली संस्कारी पार्टी की इस तरह की सभी कोशिशों के बावजूद नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार 2015 के मुक़ाबले 2016 में बलात्कारों की संख्या में 12.4 % की वृद्धि हुई है, जहाँ 2015 में बलात्कार के 34,651 मामले हुए थे, वहीँ 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 38,947 दर्ज की गयी, इसमें मध्य प्रदेश, शीर्ष पर है उसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान का नंबर आता है.

बात करें POSCO एक्ट की तो इस एक्ट में सबसे ज़्यादा मामले 4,815 उत्तरप्रदेश में दर्ज किये गए हैं उसके बाद 4717 के साथ मध्य प्रदेश का नंबर आता है.

उपरोक्त सभी तरह के आंकड़े आप नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की आधिकारिक वेब साइट पर देख सकते हैं.

और अगर 2017 के रेप आंकड़ों की बात करें तो ये भी 2015 – 16 के मुक़ाबले बढे ही हैं घटे बिलकुल नहीं हैं ! आप चाहें तो नेट पर तलाश करके देख सकते हैं.

  • बात फिर से आती है रेप और पोर्न के बीच के संबंधों की, देश में हुए कई दहला देने वाले बलात्कारों से पहले पोर्न देखने की बात सामने आयी है, मगर हर रेप के पीछे पोर्न ही ज़िम्मेदार हो इसके कोई अधिकृत आंकड़े किसी एजेंसी के पास नहीं हैं.
  • देश में हुई रेप की किसी भी वीभत्स घटना के बाद देश में हर बार की तरह पोर्न पर बैन की मांग उठने लगती है, मगर कभी इस बात की मांग नहीं उठती कि इन बलात्कारों और यौन शोषण के लिए बनाये गए क़ानूनों का सख्ती से पालन हो, फ़ास्ट ट्रेक अदालतें लगा कर लंबित मामलों का निस्तारण किया जाये.
  • बलात्कारों में शीर्ष पर रहे मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह जी का भी पोर्न पर बैन सम्बन्धी बयान आया है, उनका कहना है कि बच्चों के साथ बलात्कार और यौन शोषण के मामले बढ़ने की वजह पोर्न है, और उनकी सरकार केंद्र सरकार को पत्र लिखेगी, ताकि पोर्न साइट्स को बैन किया जा सके ! भूपेन्द्र सिंह जी के अनुसार, राज्य सरकार 25 पोर्न साइट्स को पहले ही बैन कर चुकी है.
  • यहाँ शायद भूपेन्द्र सिंह जी ये भूल गए कि उनकी ही NDA सरकार ने आज से तीन साल पहले पोर्न बैन किया था, और दूसरी बात ये भी शायद भूल गए कि उनके राज्य में 25 पोर्न साइट्स को पहले ही बैन करने के बाद भी बलात्कारों में मध्यप्रदेश टॉप पर क्यों बना हुआ है, क्या मध्य प्रदेश के बलात्कारी राजस्थान या महाराष्ट्र में पोर्न देखने जाने लगे?

पोर्न बैन की मांग को सूचना क्रांन्ति के इस दौर के परिप्रेक्ष्य में रख कर देखें तो अजीब ही लगेगा, ये कोई बीफ, चरस, गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर या मेंड्रेक्स टाइप आइटम नहीं है, जिसे बैन कर दिया जाये, ये डिजिटल शक्ल में है इसके लिए अगर किसी एक वेब साइट को बैन करेंगे तो दूसरे दिन चार और वेब साइट्स खोल लेंगे, आप वेब साइट्स को बैन करेंगे तो ये फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और व्हाट्सएप पर आसानी से उपलब्ध होगी, जो कि अभी भी हैं और आसानी से पहुँच में भी हैं.

सऊदी अरब को ही लीजिये, जितना कड़े क़ानून इस तरह की चीज़ों के लिए वहां हैं शायद कहीं हों, मगर ये पोर्न वहां भी आसानी से उपलब्ध है, मैं 2000 में वहीँ था, तब वीडियो कैसेट का दौर था, कई पाकिस्तानी पोर्न वीडियो कैसेट हर हफ्ते लेकर आते थे, यहाँ तक कि बांग्लादेशी इनकी होम डिलीवरी तक देते थे.

  • कुछ लोग बढ़ते बलात्कारों और पोर्न के लिए वर्तमान में आसानी से उपलब्ध इंटरनेट को मानते हैं या कहिये कि सूचना क्रांति के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव को मानते हैं, अगर सूचना क्रांति और इंटरनेट ही बढ़ते बलात्कारों और पोर्न के लिए ज़िम्मेदार है तो इसमें जापान को शीर्ष पर होना चाहिए था, जो कि सूचना क्रांति और इंटरनेट का उस्ताद है.
  • मगर पोर्न देखने वाले शीर्ष देशों में उसका नंबर बारहवां है, और रेप केसेज़ में भारत से पीछे है, हैरानी की बात ये है कि पोर्न देखने वाले शीर्ष देशों की सूची में भारत तीसरे स्थान पर है.
  • पोर्न बैन के विरोध में 2015 में भी सोशल मीडिया पर काफी लोग मुखर हुए थे, लोगों ने इस निजता का हनन बताया था, यहाँ तक कि तब उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने पोर्न वेबसाइट्स को बैन करने का इंटरिम ऑर्डर देने से इनकार कर दिया था, उन्होंने कहा था कि किसी भी एडल्ट को अपने कमरे में प्राइवेसी के साथ पोर्न देखने की आजादी से नहीं रोका जा सकता.

पोर्न बैन को व्यावहारिक तौर पर देखा समझा जाये तो ये बहुत ही मुश्किल काम है, वो भी एक लोकतान्त्रिक देश में, पोर्न बैन पर साइबर एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि पोर्न साइट्स पर पूरी तरह बैन इसलिए नामुमकिन है, क्योंकि इससे जुड़े सभी सर्वरों को ब्लॉक नहीं किया जा सकता.

साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार इस पर बैन करना इन कारणों से असंभव है

  1. इंटरनेट पर पोर्न कंटेंट देने वाली लाखों वेबसाइट्स हैं, सरकार यदि किसी पोर्न वेब साइट पर बैन लगाती है तो ऐसे में जिसे पोर्न कंटेंट चाहिए, वो गूगल सर्च करके इसे कहीं और से हासिल कर सकता है
  2. ब्लॉक साइट्स को प्रॉक्सी सर्वरों के जरिए एक्सेस करना मुमकिन है, ऐसी कई वेबसाइट्स हैं, जो वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) के जरिए इन साइट्स तक एक्सेस देती हैं
  3. वेबसाइट्स के कंटेंट को फिल्टर करने की व्यवस्था नहीं है, यानी पोर्न वेबसाइट्स चाहें तो एक मिरर साइट क्रिएट कर या अपने नाम में थोड़ा बहुत फेरबदल करके ये चीजें दे सकती हैं
  4. इसके अलावा, बैन तभी तक अच्छे से लागू रह सकता है, जब यह कीवर्ड बेस्ट हो या कंटेंट पर पूरी तरह नजर रखी जाए, यह प्रोसेस मेंटेन रखना आसान नहीं है
  5. वेबसाइट्स ब्लॉक करके पोर्न को नहीं रोका जा सकता, लोग Torrent जैसी साइट्स के जरिए इन्हें डाउनलोड कर सकते हैं, इसके अलावा, मार्केट में यह डीवीडी, सीडी के तौर पर भी दशकों बिक रही है
  6. पोर्न बैन से लोगों की मानसिकता नहीं बदल सकती, जिस देश में बलात्कारी और महिला यौन शोषण के आरोपी मंत्री पद तक पर विराजमान हों, और जिस देश में औरतों को क़ब्र से निकल कर बलात्कार करने जैसी विकृत मानसिकता हो, उस देश में पोर्न बैन करके क्या झक मार लेंगे?
  7. ज़रुरत है बलात्कारों के लिए पूर्व में और हाल ही में बनाये गए क़ानूनों को सख्ती से लागू करने की, ज़रुरत है इन सभी मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट्स बनाकर दोषियों को तुरत फुरत सजा दिलाने की, ज़रुरत है संस्कार पैदा करने की, महिलाओं के प्रति मानसिकता बदलने की.
  8. देश में इन दो चार क्रूर बलात्कारियों को सरे आम फांसी दे दी जाये तो आने वाले दिनों में बलात्कारों का ग्राफ निश्चित रूप से गिरेगा, ये तय है, हर दबंग और सियासी बेक रखने वाला बलात्कारी जनता है कि देश का क़ानून उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, इसी लिए हर साल बलात्कारों के आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं, ज़रुरत है रेप क़ानूनों की कड़ाई से पालना की, बेख़ौफ़ घूमते अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाने की
  9. पोर्न बैन की मांग बेशक जारी रखिये, मगर इससे पहले रेप के आरोपियों को जल्दी से जल्दी और सख्त से सख्त सजा के लिए भी मांग रखिये, जो भी रेप विरोधी क़ानून बने हैं उनकी पालना के लिए सरकारी प्रतिबद्धता को जगाने के लिए अपनी पुरज़ोर मांग जारी रखिये ! जब तक अपराधियों को इन बनाये क़ानूनों के तहत किये का दंड नहीं मिलेगा तब तक क्या पोर्न बैन और क्या कैंडल मार्च.

अब जब सरकार ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के लिए मौत की सज़ा का क़ानून राष्ट्रपति महोदय द्वारा पास कर दिया गया है तो इसके तहत आने वाले दोषियों को फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट लगाकर अविलम्ब ही मौत की सज़ा दी जाए ताकि भविष्य में अपराधियों के मन में खौफ पैदा हो, वरना इस क़ानून का भी कोई औचित्य नहीं रहेगा, ये केवल प्रेशर रिलीज़ करने या फिर औपचारिकता निभाने जैसे ही सियासी प्रयास कहलाया जायेगा.