नोएडा में हज़ारों हज़ार फ्लैट निवेशक परेशान हैं. यूपी में बीजेपी सरकार के आने पर वादे तो बहुत किए गए लेकिन क्या राहत मिल पाई/ क्या कथनी और करनी का फ़र्क मिटा?

  • नोएडा में लोग अपनी जीवन भर की पूंजी लगा कर अपने फ्लैट का मुंह देखने को तरस रहे हैं…इस रकम पर कुंडली मार कर बैठे बिल्डर्स में में एक जेपी ग्रुप भी है.
  • जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के जाल में फ्लैट बुक कराने वालों को ऐसा उलझाया कि वो घर के रहे ना घाट के.
  • 2012 में जो फ्लैट देने का वादा किया था वो आज तक नहीं मिला. आगे कब मिलेगा, मिलेगा भी या नहीं मिलेगा, ये भी नहीं पता.
  • हजारों निवेशक दोहरी मार सह रहे हैं. एक तरफ वो मकान का किराया देते हैं, दूसरी ओर उन्हें फ्लैट की किस्त भी चुकानी पड़ती है. जेपी जैसा ही हाल दूसरे बिल्डर्स का भी है.

जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड एक बैंक का कर्ज ना चुका पाने की वजह से दिवालिया होने के कगार पर है. सुप्रीम कोर्ट में केस है. सुप्रीम कोर्ट यही कह रहा है कि निवेशकों के हित सबसे ऊपर है.

सबसे हैरानी की बात ये है कि पिछले साल यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सरकार आई तो निवेशकों से वादा किया गया कि जल्दी ही उनके फ्लैट उन्हें दिलाए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने टाइमलाइन भी बताई कि दिसंबर 2017 तक उनकी सरकार 40,000 फ्लैट ग्राहकों को उनके फ्लैट दिला देगी. लेकिन सब वादे वादे ही रह गए. लोग लाखों रुपए लगा कर अपने ही फ्लैट के लिए तरस रहे हैं.

बीजेपी समेत तमाम राजनीतिक दल खुद को फ्लैट खरीददारों के हितैषी बताते हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर फ्लैट ग्राहकों की मुश्किलों में कोई कमी नहीं आई.

इतना सब कुछ होने पर भी ज़ख्मों पर नमक छिड़कना किसे कहते हैं, वो देखिए. जेपी एक तरफ लोगों से उनके खून पसीने की कमाई झटकने के बावजूद उनके फ्लैट नहीं सौंप रहा. पैसे की किल्लत बता रहा है. वहीं दूसरी ओर जेपी को अपने अपने नए वेंचर्स के लिए पैसे की कोई दिक्कत नजर नहीं आती.

जेपी ने चिट्टा, बुलंदशहर में अपने नए हॉस्पिटल का उद्घाटन किया. उसका उद्घाटन करने के लिए केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल (रिटायर्ड) वी के सिंह पहुंचे. जनरल सिंह गाजियाबाद लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हैं. आखिर उन्हें तो पता होना चाहिए कि ये ग्रुप कैसे नोएडा में फ्लैट ग्राहकों को खून के आंसू रूला रहा है.

बीजेपी नेता या केंद्रीय मंत्री को ऐसे ग्रुप के किसी वेंचर का उद्घाटन करने से पहले क्या सोचना नहीं चाहिए. क्यों नहीं राज्य और केंद्र में बीजेपी की सरकार इस ग्रुप और अन्य बिल्डर्स पर दबाव बढ़ाती जिससे कि हजारों हजारों फ्लैट ग्राहकों को राहत मिल सके.

नोट- यह लेख खुशदीप सहगल जी की फ़ेसबुक वाल से लिया गया है