फ़िल्म “टाइटैनिक” हॉलीवुड का वो नाम है,जिससे अधिकांश भारतीय जनता अवगत होगी.एक सत्य घटना पर आधारित यह फ़िल्म हॉलीवुड की बेस्ट फिल्मों में से एक मानी जाती है.तकरीबन एक सदी पहले विलासिता और शान ओ शौकत के लिए जाना जाने वाला  टाइटैनिक जहाज समुद्र में सफर करते समय अटलांटिक महासागर में डूब गया.जिसमें हजारों लोग मारे गए.हालांकि उस वक़्त दावा किया गया था कि टाइटैनिक को इस तरह से तैयार किया गया है कि वो कभी डूब नहीं सकता.इस वजह से टाइटेनिक को ‘UNSINKABLE’ यानी न डूबने वाला जहाज भी कहा जाता है.

टाइटैनिक के डूबने के समय समय पर अलग अलग तथ्य पेश किए गए हैं.उन तथ्यों को जानने से पहले टाइटैनिक जहाज के बारे जानना बेहतर होगा.

टाइटैनिक

Titanic जहाज का पूरा नाम था ‘RMS Titanic’ (RMS stands for Royal Mail Ship). इसे बनाने वाली कंपनी का नाम था ‘White Star Line’.टाइटैनिक जहाज नार्थ आयर्लैंड के बेलफास्ट में 31 march, 1909 को तीन हजार लोगो की टीम ने बनाना शुरू किया था.26 महीनों बाद 31 may, 1911 को यह बनकर तैयार हुआ.जहाज को बनाने में 75 लाख डाॅलर (करीब 48 करोड़ रूपए) का खर्च आया.

जब टाइटैनिक बनकर तैयार हुआ तब यह दुनिया की सबसे बड़ी चलने वाली चीज थी. यह 882 फीट यानि फुटबाॅल के 3 मैदान जितना लंबा और 17 माले की बिल्डिंग जितना ऊँचा था. यदि इसे सीधा खड़ा कर दिया जाता तो यह उस समय की हर इमारत से ऊँचा होता.Full load होने के बाद Titanic का वजन 46,326 टन था (करीब 4 करोड़ 63 लाख 26 हजार किलो). इतने वजन के बावजूद भी यह 42 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता था.

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प्रस्तुत तथ्यों के माध्यम से जानते हैं टाइटैनिक के डूबने की आखिर वजह क्या थी.

हिमखंड के टकराने से डूबा था टाइटैनिक

एक मई 1911 को ठीक 12 बज कर 13 मिनट पर टाइटैनिक को बेलफास्ट में पानी में उतारा गया था. बेलफास्ट से टाइटैनिक को न्यूयॉर्क ले जाया गया जहां से करीब एक साल बाद यह विशाल जहाज यात्रियों के साथ अपनी पहली और आखिरी समुद्र यात्रा पर निकला.एक विशाल आइसबर्ग से टकराने के कारण टाइटैनिक यात्रा के पांचवें दिन ही डूब गया. जहाज पर मौजूद 1,517 लोगों की मौत हो गई. 

जहाज की आइसबर्ग से टक्कर 14 अप्रैल 1912 को हुई और एक दिन बाद यानी 15 अप्रैल को वह पानी में डूब गया. कई दशकों तक इसके मलबे की तलाश चली. आखिरकार 1985 में समुद्र तल से करीब चार किलोमीटर नीचे पड़ा इसका मलबा ढूंढ लिया गया. ऐसा माना जाता है कि जहाज के सभी 16 कंपार्टमेंट जलरोधी थे. लेकिन 14 अप्रैल की रात हिमखंड से टक्कर के बाद टाइटैनिक के पांच कंपार्टमेंटों को नुकसान पहुंचा और उसमें पानी भरने लगा. जहाज में सवार यात्री समंदर में कूद गए.

जहाज में यात्री और चालक दल के सदस्यों को मिलाकर 2,200 लोग सवार थे. 15 अप्रैल को रात 2.20 बजे जहाज डूब गया. टाइटैनिक में लाइफबोट की कमी के कारण करीब पंद्रह सौ से ज्यादा लोगों की उत्तर अटलांटिक के ठंडे पानी में डूबने से मौत हो गई. 700 लोगों को बचा लिया गया जिनमें ज्यादातर बच्चे और महिलाएं थीं.

क्या आग थी मुख्य वजह?

‘Titanic: The New Evidence’.नामक डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि इतनी बड़ी दुर्घटना का मुख्य कारण आग थी, जिसके कारण जहाज डूब गया था.

विशेषज्ञों के मुताबिक यह आग तीन हफ्तों तक लगी रही और किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया. इसी आग के कारण जहाज़ क्षतिग्रस्त हो गया था. फिर जब सफ़र के दौरान आइसबर्ग के साथ इसकी टक्कर हुई, तो कमज़ोर होने के कारण वह डूब गया.

विशेषज्ञों के मुताबिक आग शायद जहाज़ के बॉयलर रूम के पीछे बने तीन मंजिला ईंधन स्टोर में लगी होगी. इसके बाद जब टाइटैनिक आइसबर्ग से टकराया, तब तक आग के कारण स्टील से बनी इसकी पतवार काफी कमज़ोर हो गई होगी. इसी वजह से आइसबर्ग के साथ टकराने पर जहाज़ की लाइनिंग टूट गई. हालांकि, इस आग की जानकारी अधिकारियों को हो गई थी.
वहीं एक पत्रकार के मुताबिक इस आग वाली बात को यात्रियों से छुपा कर रखा गया था. इस घटना के पीछे लापरवाही भी थी. अगर आग नहीं लगी होती, तो शायद 75 प्रतिशत तक क्षति को कम किया जा सकता था.

क्या चालक दल ने की थी गलती?

‘गुड एज गोल्ड’ नाम की किताब में दावा किया गया है कि टाइटैनिक डूबने की असली वजह चालक दल की गलती का नतीजा था.

इस किताब में दावा किया गया है कि चालक दल चाहता तो इस भयानक त्रासदी को टाला जा सकता था.इस बारे में द टेलिग्राफ में भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी,जिसके मुताबिक इस घटना के सौ साल बाद इस पुस्तक में कहा गया है कि हिमखंड को देखने के बाद चालक दल के पास काफी समय था और वे टाइटैनिक को उससे टकराने से बचा सकते थे. लेकिन वे इस कदर भयभीत हो गए कि जहाज को उन्होंने उसी दिशा में मोड़ दिया.जब तक पता चलता तब तक काफी देर हो चुकी थी.