आज से ठीक 44 साल पहले भारत ने पहला परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था.तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने ये करिश्मा कर दिखाया था.भारत के इस धमाके से अमेरिका तक हैरान था.

भारत के इस परीक्षण को जहां इंदिरा गांधी ने शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण करार दिया तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने भारत को परमाणु सामग्री और ईधन की आपूर्ति रोक दी थी.

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सीक्रेट कोड था “लाफिंग बुद्धा”

18 मई 1974 को उस दिन बुद्ध जयंती थी.तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उस दिन एक फोन का इंतजार कर रही थीं. उनके पास एक वैज्ञानिक का फोन आता है और वह कहते हैं “बुद्ध मुस्कराए”. इस संदेश का मतलब था कि भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दिया है जो सफल रहा. इसके बाद दुनिया में भारत पहला ऐसा देश बन गया था जिसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य न होते हुए भी परमाणु परीक्षण करने का साहस किया है. यह वह दौर था जब भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी चरम पर  थी.

70 के उस दशक में भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश बनाने में मदद की थी और अमेरिका का पलड़ा पाकिस्तान के लिए ज्यादा झुका रहता था. इसकी वजह यह भी थी कि अमेरिका सोवियत संघ के खिलाफ पाकिस्तान के एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था. दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत अब भी गुटनिरपेक्ष देश बना हुआ था. अमेरिका इससे भी नाराज था. वह चाहता था कि भारत उसका हर बात पर समर्थन करे.

इतना ही नहीं चीन भी उस समय भी पाकिस्तान के साथ ही था.यानी पाकिस्तान के समर्थन में उस समय दुनिया दो बड़े देश खड़े थे लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों का बहादुरी सामना किया और सुरक्षा को लेकर देश के अंदर भी आवाज उठ रही थी.शक्ति संतुलन के लिए भारत को परमाणु क्षमता हासिल करना बेहद जरूरी हो गया था. लोगों का कहना था कि भारत के पास ये ताकत होगी तो वह दुनिया में सशक्त देशों के बीच आ जाएगा.Image result for indira gandhi pokhran

PTBT बना राह में रोड़ा
इससे परीक्षण से पहले राह में कई रोड़े आ गए. पहले तो IAEC के चेयरमैन और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक विक्रम साराभाई का निधन हो गया. उनकी जगह होमी सेठना को लाया गया. लेकिन एक बाधा और आ गई. भारत ने PTBT नाम के एक समझौते पर हस्ताक्षर कर रखा था जिसके मुताबिक कोई भी देश इस समझौते के तहत वातावरण में परमाणु परीक्षण नहीं कर सकता था. समझौते में वातावरण का मतलब आसमान, पानी के अंदर, समुद्र शामिल था. तब भारत ने इस परीक्षण को जमीन के अंदर करने का निर्णय लिया.

किसी को नहीं होने दी कानों कान खबर
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक राजा रमन्ना ने अपनी आत्मकथा  ‘इयर्स ऑफ पिलग्रिमिज’ में लिखा है कि इस पूरे ऑपरेशन के बारे में पीएम इंदिरा गांधी के अलावा, मुख्य सचिव पीएन हक्सर, पीएन धर, वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. नाग चौधरी और एटॉमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन एच. एन. सेठना और खुद राजा रमन्ना को ही जानकारी थी. कुछ लोगों का दावा है कि रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम को भी ऑपरेशन सफल होने के बाद ही जानकारी हो पाई थी.

विस्फोट स्थल का निरीक्षण करते हुए इंदिरा गांधी की तस्वीरें भारत में अखबारों के पहले पृष्ठ पर उस समय के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों के साथ प्रमुखता से छापी गयी. इस सफलता के बारे में राजा रामन्ना ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि पोखरण परीक्षण देश के परमाणु इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है और यह भारत की तकनीकी प्रगति को साबित करता है, जिसके लिए हम आजादी के बाद से ही प्रयास कर रहे थे.

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कैसा था बम और कब हुआ विस्फोट
परमाणु बम का व्यास 1.25 मीटर और वजन 1400 किलो था.सेना इसको बालू में छिपाकर लाई थी.18 मई के दिन परमाणु टेस्ट के लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. विस्फोट पर नज़र रखने के लिए मचान को 5 किमी दूर लगाया गया था. इसी मचान से सभी बड़े सैन्य अधिकारी और वैज्ञानिक नज़र रखे हुए थे. आखिरी जांच के लिए वैज्ञानिक वीरेंद्र सेठी को परीक्षण वाली जगह पर भेजना तय हुआ. जांच के बाद परीक्षण स्थल पर जीप स्टार्ट ही नहीं हो रही थी. विस्फोट का समय सुबह 8 बजे तय किया गया था.
वक्त निकल रहा था और जीप स्टार्ट न होने पर सेठी दो किमी दूर कंट्रोल रूम तक चलकर पहुंचे थे. इसके पूरे घटनाक्रम के चलते परीक्षण का समय 5 मिनट बढ़ा दिया गया.

सुबह 8 बजकर 5 मिनट पर यह राजस्थान के पोखरण में विस्फोट किया था. बताया जाता है कि 8 से 10 किमी इलाके में धरती हिल गई थी.इस टॉप सीक्रेट प्रोजेक्ट पर लंबे समय से एक पूरी टीम काम कर रही थी. 75 वैज्ञानिक और इंजीनियरों की टीम ने 1967 से लेकर 1974 तक 7 साल जमकर मेहनत की. इस प्रोजेक्ट की कमान BARC के निदेशक डॉ राजा रमन्ना थे. रमन्ना की टीम में तब एपीजे अब्दुल कलाम भी थे जिन्होंने 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण की टीम का नेतृत्व किया था.

1974 के बाद 11 मई 1998 को पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो इजरायल को छोड़कर विश्व के सारे देश भारत के खिलाफ उठ खड़े हुए.अमेरिका सहित कई देशों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए.भारत ने 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक पांच परमाणु परीक्षण किए थे.इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘जय विज्ञान’ का नया नारा देश को दिया था.