सीने में दर्द की शिकायत के बाद डॉ कफ़ील को मेडिकल चेकअप लिए गोरखपुर ज़िला अस्पताल लाया गया था. लौटते समय जब मीडिया ने डॉ कफ़ील से बात करना चाहा तो पुलिस के रवैये ने सभी को हैरान कर दिया.

जब मीडिया ने डॉ कफ़ील से बात करनी चाही, तो साथ में खड़े पुलिस अधिकारी ने उनके मुंह और मीडिया के बीच बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की पर डॉ कफ़ील ने इसी बीच कहा कि “यह एक प्राशासनिक नाक़ामी है, मुझे फसाया जा रहा है”.

डॉ कफ़ील के साथ पुलिस ने कुछ इस तरह का बर्ताव किया, जिसकी सभी जगह निंदा हो रही है

 

कुछ दिन पहले ही डॉ कफील की पत्नी डॉ शाबिस्ता खान ने जेल प्रशासन पर उनके ख़राब तबीयत पर धयान न देने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था.

साबिस्ता ने कहा है कि एनआरएचएम से जुड़ें डॉक्टरों की तरह उनके पति की भी जान लेने की कोशिश हो सकती है. डा. सबिस्ता खान ने ‘हिन्दुस्तान को बताया कि उनके पति हृदयरोग से पीड़ित हैं. 28 मार्च को उन्हें जेल में हार्ट अटैक आया था.

डॉ कफील खान जब जांच के बाद बाहर निकले तो मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल पूछा जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें फंसाया गया है. ऑक्सीजन कांड पूरी तरह से प्रशासनिक था. उनके यह कहते ही पुलिसकर्मियों ने उनके मुंह पर हाथ रख दिया और खींचते हुए बाहर ले गए.

वह और भी कुछ कहना चाहते थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें बोलने नहीं दिया और एम्बुलेंस में बिठाकर जेल ले गए.