अमेरिका के एक क़दम से विश्व राजनीति में भूँचाल आ गया है. अमेरिका ने सभी 60 रूसी राजदूतों को देश से निकाल दिया है. साथ ही अमेरिका में रूसी दूतावास को बंद आकर दिया गया है.

ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के एक अधिकारी ने कहा, “अमेरिका में राजनयिक के तौर पर काम कर रहे ये लोग असल में जासूस थे. जिस वजह से उन्हें अमेरिका से निकाला गया है.

ज्ञात होकि कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन ने भी 23 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था, ब्रिटेन का कहना था कि ये अघोषित रूप से इंटेलिजेंस एजेंट थे. खबर यह भी आ रही है कि जर्मनी ने भी चार रूसी

ज्ञात होकि ब्रिटेन ने रूस पर आरोप लगाया था कि उसने पूर्व रूसी जासूस को ब्रिटेन में एक नर्व एजेंट के जरिये जहर देकर मारने की कोशिश की. 66 साल के रिटायर्ड रूसी सैन्य ख़ुफ़िया अधिकारी स्क्रिपल और उनकी 33 वर्षीय बेटी यूलिया सेलिस्बरी सिटी सेंटर में एक बेंच पर बेहोशी की हालत में मिले थे. जिन्हें ज़हर दिया गया था.

अमेरिका के अलावा करीब एक दर्जन देशों से ऐसे ही कदम उठाने की उम्मीद की जा रही थी. इनमें रूस के पड़ोसी देश भी शामिल हैं. पोलैंड ने रूस के राजदूत को इस मसले पर बातचीत के लिए समन भेजा था.

यूरोपियन यूनियन ने भी इस बात के संकेत दिए थे कि उसके सदस्य देश रूस के खिलाफ सुरक्षात्मक कदम उठा सकते हैं. ईयू ने अपने राजनयिक को भी रूस से वापस बुला लिया था.

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सेंडर्स ने कहा कि आज की कार्रवाई, जिसमें अमेरिकियों पर जासूसी करने और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले गुप्त अभियान चलाने की रूस की क्षमता को घटाया गया है. इसके चलते अमेरिका और सुरक्षित हुआ है.

यह कदम उठाकर अमेरिका और हमारे सहयोगियों तथा साझेदारों ने रूस को यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी गतिविधियों के दुष्परिणाम होंगे.