देहरादून में हिन्दू मुस्लिम एकता की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. जहां एक मुस्लिम व्यक्ति ने रोजा तोड़कर एक हिन्दू व्यक्ति की जान बचाते हुए इंसानियत की एक बड़ी मिसाल कायम की है. इस कारनामे को अंजाम देने वाले व्यक्ति का नाम आरिफ है, साथ ही जिस व्यक्ति की जान बचाई गई है उसका नाम अजय है.

मामला कुछ यूं है, कि मैक्स अस्पताल में भर्ती अजय बिजल्वाण की हालत अचानक गंभीर हो गई थी. लीवर में बीमारी के चलते अजय का प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगे और शनिवार की सुबह तक पांच हज़ार से भी कम हो गई थी.

जिसके बाद चिंतित डॉक्टरों ने पिता खीमानंद को कहा कि अगर ए पॉजिटिव खून नहीं मिला तो जान को खतरा हो सकता है, काफी कोशिशों के बाद भी डोनर नहीं मिला।. इसके बाद पिता ने रिश्तेदारों के कहने पर सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर मदद मांगी.

सोशल मीडिया में फैली इस खबर के बाद नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान बिना देर किए खून देने को तैयार हुए. जिसके बाद डॉक्टरों ने आरिफ से कहा कि खून देने से पहले आप कुछ खाना पड़ेगा, यानी की रोजा तोड़ना पड़ेगा.

आरिफ बिना देर किये अस्पताल पहुंच गए और आरिफ के साथ साथ चार लोग और भी पहुंचे. आरिफ ने खून देने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर रोजा तोड़ने से किसी की जान बचती हो मैं पहले इंसानियत निभाऊंगा. आरिफ ने कहा- रोजे तो बाद में रखे जा सकते है, लेकिन जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती. रमजान में ज़रूरतमंदों की मदद करने का बड़ा अहमियत होती है.

इस घटना के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी इसे मानवधर्म बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि आरिफ ने अजय की जान बचाने के लिए अपना रोजा तोड़ा. यही प्यार है असली मानव धर्म. जो लोग धर्म की आड़ में लोगों को लड़वाते हैं, वह मानव धर्म को कलंकित कर रहे हैं.