लखनऊ, 5 मई 2018

पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी के पर हमला नया नहीं है इससे पहले 16 जुलाई 2010 को दिल्ली में RSS द्वारा आजतक के हेड ऑफिस झंडेवालान पर हमला हुआ था और आजतक के झंदावालान दफ्तर में हजारो कार्यकर्ताओ ने तोड़ फोड़ की थी, जिसके परिवेश में आरएसएस का एतराज़ था की उनके नेताओ पर आजतक ने एक ऐसा स्टिंग दिखाया जिसमे हामिद अंसारी की हत्या को लेकर RSS के बड़े नाम दिखाए गए थे, हेडलाइंस टुडे के एक विडियो में दिखाया गया था की भारत के पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी की किसी कार्य्रक्रम में ह्त्या कर देनी है जिसकी प्लानिंग आरएसएस द्वारा बनाई गयी और इसके बाद झंडेवालान कार्यालय पर हमला हुआ था जिसे लेकर आजतक को RSS के सामने सरेंडर होना पडा था!

देश में उभरती युवा आवाज़ और सामजिक न्याय के पक्षधर अमीक जामेई ने आज दिए बयान में कहा है की AMU में पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी का विसिट का यह वही समय था जिसका ज़िक्र आजतक के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था लेकिन छात्रों की वजह से पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी की जान बच गयी,
हेडलाइन पर चली विडियो में दिखाया गया था की जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक कार्यक्रम में नियोजित बम विस्फ़ोट में उनकी हत्या होनी है जिस साज़िश के पीछे किन्ही डॉ आर पी सिंह का नाम आया था इन्ही विडियो टेप में इंद्रेश कुमार, बीजेपी के नेता बीएल शर्मा, दिल्‍ली के एंडोक्रिनोलॉजिस्‍ट डॉ. आरपी सिंह और पुणे के वाडिया कॉलेज में रसायन विभाग के प्रमुख डॉ. शरद कुंठे शामिल थे।

हेडलाइन के मुताबिक फ़रीदाबाद में 2008 में एक बैठक हई जिसमे आरपी सिंह, दयानन्द पांडे, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और बीएल शर्मा मौजूद थे इसी बैठक में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति की हमले की साजिश रची गयी जो बाद में कामयाब हो गयी!

जामेई ने कहा की इस होने हत्या ऑपरेशन के फेल होने पर हिन्दू वाहिनी के गुंडों ने इसे जिन्ना विवाद का सहारा लेकर इस षड्यंत्र को छिपा लिया है, जिसमे अलीगढ़ के भाजपा सांसद सतीश गौतम और प्रदेश की पुलिस में कुछ अफसर इन्वोल्व है!

अमीक जामेई ने कहा की पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी की सुरक्षा व प्रोटोकाल की ज़िम्मेदार केन्द्रीय गृह मंत्रालय है ऐसी चूक के लिए गृह मंत्रलाय ज़िम्मेदार है, श्री राजनाथ सिंह से पूछना चाहता हूँ की पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी की सुरक्षा में सेंध कैसे लगी? कैसे हथियार लहराते हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्त्ता जो अवैध्य हथियार लेकर हत्या के मकसद से आये बिना किसी जाँच के कैसे उन्हें उसी वक़्त उत्तर प्रदेश पुलिस ने छोड़ दिया? क्या उत्तर प्रदेश की अलीगढ पुलिस की पूर्व उपराष्ट्रप्रति हामिद अंसारी पर हमला करवाने में शामिल है? पटियाला हाउस कांड हो या प्रशांत भूषण पर हमला आखिर ऐसा क्यूँ होता है की भाजपा और जुड़े संगठन द्वारा किये हत्या के प्रयास या दंगे फैलाये जाने के माहौल में पुलिस उनके साथ खड़ी होती है?