देश की राजधानी दिल्ली में 23 वर्षीय अंकित की प्रेम प्रसंग के चलते की गई हत्या पर. अंकित फोटोग्राफर था और ‘ऑवारा ब्वॉयज’ नाम से यू ट्यूब चैनल चलाता था. पत्राचार से ग्रेजुएशन करने वाली मुस्लिम समुदाय की 20 वर्षीय लड़की से उसे प्रेम हुआ. आरोप है कि लड़की के घरवालों ने अंकित की सरेराह गला रेत कर हत्या कर दी. इस आरोप में पुलिस ने लड़की के माता, पिता और चाचा को गिरफ्तार किया.

तीनों को 14 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. इस घटना में लड़की के नाबालिग भाई को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, उसे सुधार गृह में भेज दिया गया है. खुद लड़की का भी कहना है कि उसके घरवालों ने ही अंकित की हत्या की. अंकित ने भी लड़की से प्रेम प्रसंग की बात अपने घर वालों से छुपा रखी थी. लड़की खुद की हत्या की आशंका जताते हुए अपने घर वापस नहीं जाना चाहती इसलिए पुलिस ने उसे शेल्टर हाउस भेज दिया है.

ख़ैर ये तो थी घटना की बात. अब आते हैं मूल मुद्दे पर, अंकित की हत्या की जितनी निंदा की जाए कम है. ऐसी घटना को अंजाम देने वालों को सख़्त से सख़्त सज़ा, चाहे फांसी ही क्यों ना हो, दी जानी चाहिए. ऐसा मैं भी मानता हूं. इस घटना को प्यार के दुश्मनों ने अंजाम दिया, ऐसे दुश्मन हर समुदाय में हैं. हमारा क़ानून, हमारा संविधान यही कहता है कि अगर दो बालिग़ एक दूसरे से प्यार करते हैं और जीवनसाथी बनना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है. अगर घरवालों समेत कोई उन्हें ऐसा करने से रोकता है तो वो क़ानून के मुजरिम है. पुलिस को ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के साथ जोड़े को सुरक्षा देने की भी ज़िम्मेदारी होती है.

अंकित के साथ जो हुआ वो विशुद्ध ऑनर किलिंग (या हॉरर किलिंग) का मामला है. इसका हवाला देते हुए पूरे के पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है. ना ही किसी समुदाय की बहुलता वाले मोहल्लों के नामों का उल्लेख करना भी वाज़िब है.

प्रेम प्रसंगों में हॉरर किलिंग हम हरियाणा समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी देखते आए हैं. खापों ने किस तरह के फ़तवे अतीत में सुनाए हैं, वो हम सभी को पता है. मेरा निवेदन इतना ही है कि हॉरर किलिंग की घटना को हॉरर किलिंग की तरह ही देखा जाए. अपराधियों को अपराधियों की तरह ही लिया जाए, उन्हें उनके सम्प्रदाय से जोड़ कर प्रस्तुत करना सही नहीं है.

अंकित के हत्यारों को उनकी करनी का फल ज़रूर मिलेगा. देश का क़ानून इस काम को अंज़ाम देगा. ये हिन्दू लड़के और मुस्लिम लड़की का प्रकरण था. पिछले दिनों देश में एक नाम बहुत सुना गया ‘लव जिहाद’. इसका इस्तेमाल वहीं किया गया जहां मुस्लिम लड़के और हिन्दू लड़की से जुड़े प्रेम प्रसंग सामने आए. बालिग लड़का और लड़की, चाहे वो किसी भी समुदाय से हो उन्हें अपनी मर्जी से शादी और साथ रहने का अधिकार है.

जिस तरह किसी भी मुस्लिम समुदाय के बालिग लड़के और हिंदू समुदाय की बालिग लड़की के प्रेम प्रसंग को ‘लव जिहाद’ का नाम देना ग़लत होगा उसी तरह दिल्ली में जिस अखिल की हत्या हुई, उसके और मुस्लिम लड़की के प्रेम प्रसंग को अगर कोई ‘रिवर्स लव जिहाद’ का नाम देता है तो वो भी ग़लत होगा.

केरल की हिंदू लड़की अखिला उर्फ हदिया और मुस्लिम लड़के शफीन जहां की शादी का मामला सुप्रीम कोर्ट में अब भी चल रहा है. यहां लड़की के माता-पिता का कहना था कि उनकी लड़की को बहला-फुसला कर शादी की गई और धर्मपरिवर्तन करा दिया गया. जबकि लड़की का कहना है कि उसने बिना किसी दबाव अपनी मर्जी से शफीन जहां से शादी की है. लड़की के पिता की याचिका पर केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ये शादी रद्द कर दी थी. इसे शफीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट की बेंच को ये तय करना है कि हाईकोर्ट दो बालिगों की शादी को रद्द करने का फ़ैसला दे सकता है या नहीं. 22 जनवरी को हुई सुनवाई में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर लड़की कहती है कि उसे शादी से ऐतराज़ नहीं है तो मामला ही ख़त्म हो जाता है. अब इस पर 22 फरवरी को सुनवाई होगी.

हाल ही में राजस्थान के राजसमंद जिले में हुई एक वीभत्स घटना का भी ज़िक्र करना चाहता हूं. यहां शंभूलाल रैगर ने अफराजुल नाम के एक शख्स की ना सिर्फ जिंदा जला कर हत्या की, बल्कि उसका लाइव वीडियो अपने भांजे से बनवा कर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था. वीडियो में शंभू ये कहते हुए भी सुना गया था वो एक ‘हिंदू बहनों’ को लव जिहाद से बचाना चाहता था. यानि उसने इस हत्या को ‘लव जिहाद’ और ‘ऑनर किलिंग’ का रंग दे दिया.

बाद में पुलिस की जांच से सामने आया कि जिस ‘हिन्दू बहन’ को उसने बचाने के नाम पर ये सब किया था, उसी से उसका ‘अफेयर’ था जिसकी जानकारी अफ़राजुल को भी थी. पुलिस की ओर से बाद में चार्जशीट में दावा किया गया कि शंभू पश्चिम बंगाल से आए इन मजदूरों को भगाना चाहता था ताकि अपने ‘अफेयर पर पर्दा डाल सके. अफराजुल के घर में दो लड़के काम करते थे. इन दोनों लड़कों का संबंधित महिला के घर में आना-जाना शंभू को बहुत खटकता था. यहां ये बताना भी ज़रूरी है कि शंभू पहले से ही शादीशुदा था.

शंभू की गिरफ्तारी के बाद राजसमंद और उदयपुर ज़िलों में कुछ दिन के लिए तनाव भी फैला. बंद भी रखा गया था. इसके अलावा शंभू की पत्नी के बैंक खाते में देश के विभिन्न क्षेत्रों से 516 लोगों की ओर से करीब 3 लाख रुपए भी जमा हुए थे जिससे कि शंभू का केस लड़ा जा सके. पुलिस ने ऐसे दो व्यापारियों को भी हिरासत में लिया है, जो इस खाते में पैसा जमा करने के बाद इसकी रसीद की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे. ज्ञात हो कि मीडिया में यह ख़बरें आयीं थी कि सोशल मीडिया पर शंभूलाल के समर्थन में आर्थिक मदद के लिए उनकी पत्नी के बैंक खाते की जानकारी शेयर की जा रही है. पुलिस का कहना है कि यह सूचना मिलने के बाद यह बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया गया.

ये सब लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि पारंपरिक मीडिया या सोशल मीडिया पर भी जो भी लिखा जाए, उसके एक-एक शब्द को पहले पूरी तरह नाप-तौल लिया जाए. अपराधी कोई भी हों, किसी भी समुदाय से हों, उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए ईंट से ईंट बजा दी जाए तो ये पत्रकारिता का धर्म है. लेकिन ऐसा कुछ भी ना लिखा जाए जो किसी अपराधी या अपराधियों के बुरे कामों के लिए, उसके पूरे समुदाय को ही जिम्मेदार ठहरा दे. हमारा लिखा ऐसा होना चाहिए जो समाज में मेलजोल को बढ़ाए, ना कि दूरी को बढ़ाए.

अंत में एक निवेदन और कि मैंने जो लिखा, उसे आप अन्यथा ना लीजिएगा. आपके लिए मेरे मन में बहुत.सम्मान है, वैचारिक मतभेद हो सकते हैं मनभेद नहीं.

– खुशदीप सहगल
लेख़क इंडिया टुडे ग्रुप में हैं, विभिन्न मीडिया संस्थानों में एडिटर के रूप में कार्य कर चुके हैं, यह लेख उनकी फ़ेसबुक वाल से लिया गया है